मॉब लिंचिंग के विरोध का विरोध करने वाले भारत माता के दामन पर एक बदनुमा दाग

6:31 pm Published by:-Hindi News

प्रिय फकीरीपरस्त प्रसून जोशी, किचाइनप्रेमी कंगना एवं समस्त हत्याप्रेमी गैंग, आपकी आत्मा को शांति पहुंचे।

चूंकि, आप लोगों ने मॉब लिंचिंग के विरोध का विरोध किया है, इसलिए यह समझना चाहिए कि आप मॉब लिंचिंग को बनाये रखने के लिए गम्भीर हैं। इसलिए मैं आपको ‘हत्यप्रेमी गैंग’ कहकर संबोधित कर रहा हूं। उम्मीद है आपको गर्व की अनुभूति होगी।

आपको, आपके नजरिये से हम एक खुशखबरी देना चाहते हैं कि दिल्ली में एक और नाबालिग की पीटकर हत्या कर दी गई है। उम्मीद है कि आपको अपार हर्ष की अनुभूति होगी, आपके अंदर आशाओं और आकांक्षाओं का संचार होगा और आपकी सरकार, आपके देश की कीर्ति दुनिया में फैलेगी, जैसा आपने एक चिट्ठी में जाहिर किया है।

हमने किताबों में पढ़ा है कि राक्षस और शैतान लोग रक्तपिपासु होते थे। वे हत्याओं पर खुश होते थे। साधु संत उदारमना होते थे, वे जीव हत्या को पाप समझते थे, जब ऐसा अन्याय बढ़ता था तब वे सर्वशक्तिमान विष्णु के पास भागते थे।

हम राक्षस और देवता की जगह लोकतंत्र में यकीन रखते हैं। हम सब आम नागरिक जब किसी अन्याय से भयभीत होते हैं तो भारत में सर्वशक्तिमान सरकार से गुहार करते हैं। आप लोगों को यह बुरा लगता है। हैरत है कि आपको लगता है कि भीड़ की हत्याओं से नहीं, उसके खिलाफ कानून बन जाने से भारत का गौरव कम हो जाएगा! हत्या से किसका गौरव बढ़ेगा? भारत का? सरकार का? भारत जैसे महादेश के प्रधानमंत्री का? अगर आप लोग ऐसा सोचते हैं तो दुख के साथ कहना होगा कि आप भारत माता के दमन पर एक बदनुमा दाग हैं।

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बहरहाल, आज फिर से आपके खोपड़ी पीटने का दिन है। भारत की सर्वोच्च अदालत आज भी मॉब लिंचिंग को जघन्य अपराध मानती है। उसने 11 राज्यों को अवमानना नोटिस जारी किया है कि हमारे आदेश पर अमल न करके कोर्ट की अवमानना क्यों की गई? आपके नजरिये से देखें तो यह भी बड़ा बुरा हुआ।

अगर फकीरपरस्ती और हत्याओं पर उत्सव से वक़्त मिला हो तो आपको मालूम होगा कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों के लिए गाइड लाइन जारी की थी और मॉब लिंचिंग रोकने के उपाय करने का आदेश दिया था। इस आदेश पर किसी ने अमल नहीं किया। आपके हिसाब से आपके भारत की लाज बच गई होगी!

बताइये कितनी गलत बात है! मॉब लिंचिंग के लिए कोर्ट भी सरकार से ही जवाब तलब कर रहा है और कानून बनाने को कह रहा है।

सुप्रीम कोर्ट को नक्सलियों से कहना चाहिए कि मॉब लिंचिंग पर कानून बनाएं, है कि नहीं? सरकार से मॉब लिंचिंग पर कुछ कहना तो देशद्रोह जैसा कुछ है, जैसा आपने काउंटर चिट्ठी में लिखा है!

जैसा सुप्रीम कोर्ट और पूरी दुनिया मानती कि कानून व्यवस्था सरकार संभालती है। देश सरकार के ही इकबाल से चलता है। आपकी शिकायत है कि नक्सली हिंसा होती है तो बुद्धिजीवी चुप क्यों रहते हैं?

कृपया आप विद्वान लोग यह बताने की महान कृपा करें कि क्या भारत देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाले नक्सली और भारत सरकार एक बराबर हैं? इस देश के प्रति जवाबदेह कौन है? नक्सली या भारत सरकार? जनता ने नक्सलियों को अपना प्रतिनिधि चुना है या सरकार उसकी प्रतिनिधि है? अगर नागरिकों को किसी वजह से असुरक्षा महसूस होती है तो किसके पास जाना चाहिए? सरकार के पास या नक्सलियों के पास? और जो सरकार देश का अकूत संसाधन नक्सल समस्या के नाम पर झोंक रही है, उससे पूछिये के पिछले 10 सालों में कितने नक्सली नेताओं को मारा गया?

हमारी समझ से तो नक्सल समस्या से बचने के लिए नागरिक सरकार से ही गुहार लगाएंगे। आपको लगता है कि बुद्धिजीवी लोग नक्सल हिंसा रोक सकते हैं तो यह नेक काम आपको आज ही कर लेना चाहिए। आप घटिया सनीमा बनाकर करोड़ों रुपये क्यों कमा रही हैं? नक्सल से देश की रक्षा ही आपका परम धर्म होना चाहिए। आप धर्म से च्युत होकर भारत से गद्दारी क्यों कर रही हैं?

दुनिया मे ऐसा नागरिक समाज शायद कहीं हुआ हो जो भीड़ की हत्या के समर्थन में खड़ा हो। आप लोगों ने भारत का नाम रोशन किया है।

किस बेचारे गांधी ने ये सोचा होगा कि आज़ाद भारत जब 70 साल आज़ादी का लुत्फ उठा चुका होगा, उसके बाद इस देश मे कानून के राज को सस्पेंड करके लोग भीड़ की हत्याओं का समर्थन करेंगे?

आप लोगों ने गाँधी और भगत सिंह के बलिदानों को ही नहीं, इस देश की सौ साल की आज़ादी की लड़ाई और समस्त विरासत को कलंकित किया है। कला के साथ आपने क्या किया, वह तो सबको मालूम ही है। देश आपको सदियों तक याद रखेगा।

दुआ है कि ईश्वर आप लोगों को सद्बुद्धि दे ताकि आप किसी बेगुनाह की हत्या में भारत का गौरव खोजने की जगह उसे उसके हाल पर छोड़ दें। दुआ है कि आप भीड़ की हत्याओं पर उत्सव मनाने की जगह अपने घटिया सनीमा में ही मनोरंजन खोज पाने की शक्ति हासिल कर पाएं।

इसी कामना के साथ
आपका

कृष्णकांत

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