लोकसभा चुनाव आने के साथ ही उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपनी कट्टर हिंदुत्व छवि से बाहर निकलने की कोशिशे शुरू कर दी है। अब वह समाज के सभी वर्गों के बीच गहरी पैठ बनाने की लगातार कोशिश में हैं।

एक कार्यक्रम में उन्होने कहा कि ‘अगर मुझे मस्जिद से आमंत्रण मिलता है तो मैं वहां भी जाऊंगा। मुझे बतौर मुख्यमंत्री कहीं जाने में कोई दिक्कत नहीं। वैसे मैं हिंदू हूं और मेरी आस्था के अनुसार पूजा पद्धति की मुझे स्वतंत्रता है। मैं प्रदेश के हर धर्म-मत के नागरिक का मुख्यमंत्री हूं और सबको अपनी आस्था अनुसरण के लिए सरकार पूरी सुरक्षा देगी।’

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए कानून का राज होना ही चाहिए। पहले सत्ता के संरक्षण में अपराधी थे। हम हर किसी को सुरक्षा की गारंटी दे रहे हैं लेकिन अगर पुलिस पर गोली चलाएगा तो हम उसे गारंटी नहीं दे सकते। पहले अपराधी मंत्री के साथ होते थे अब रेडी लगाकर सब्जी-फल बेच रहे हैं। सम्मान के साथ काम करें, मानवाधिकारों की रक्षा भी होगी। पहले पश्चिमी यूपी में पलायन हो रहे थे। महिलाओं-बच्चियों को लोग घरों से दूर रखते थे। आज हालात बदल गए हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने अखिलेश यादव पर भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण के आरोप लगाते हुए कहा कि जनता के सामने इनकी पोल खुल चुकी है। 2017 के चुनाव में भाजपा 100 प्रतिशत रिजल्ट देगी। राहुल-सोनिया भी इससे पहले यहां से पलायन कर जाएंगे। राम मंदिर पर उन्होंने कहा कि सरकार इसमें पक्षकार नहीं है। कोर्ट में मामला है। बाहर भी कुछ प्रयास हो रहे हैं। कांग्रेस के लोग अडंगा न डालें तो शायद इस पर जल्दी फैसला आ जाए।

ध्यान रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक दौर में मदरसों के विरोध में थे। वो सीएम बनने से पहले तक योगी मदरसों को लेकर तरह तरह आरोप लगाते रहते थे। लेकिन अब मदरसों को लेकर उनके तेवर बदल गए हैं। योगी कह रहे हैं कि मदरसों को बंद करना हल नहीं है, बल्कि मदरसों और संस्कृत विद्यालय का आधुनिकीकरण करना चाहिए। मदरसा और संस्कृत विद्यालय की बात एक साथ करना योगी की परपंरागत छवि के विपरीत नजर आ रहा है।

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