ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या विवाद पर दोनों पक्षों द्वारा मामलें को सुलझाने की नसीहत पर कहा कि बातचीत की कोई सूरत नहीं बची है. इस बारे में सात बार बातचीत असफल हो चुकी है, इसीलिए तो हम यहां आए हैं.

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में उन्होने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आएगा सभी को मानना होगा. इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी नेता सुब्रमन्यम स्वामी की कानून बनाकर राम मन्दिर निर्माण की धमकी पर ओवैसी ने कहा, किसी भी सरकार को यदि बहुमत मिला है तो उसे क़ानून के मुताबिक़ फैसला लेना चाहिए अगर वो ऐसा नहीं करती है तो जनता उसके ख़िलाफ़ जाएगी. इंदिरा गांधी के समय भी ऐसा ही हुआ था.

उन्होंने आगे कहा, स्वामी फ़्रस्टेशन के शिकार हैं, उन्हें भरोसा नहीं, वो ब्लैकमेल कर रहे हैं. डेमोक्रेसी के नाम पर स्वामी ब्लैकमेल नहीं कर सकते. अगर सुप्रीम कोर्ट ने कल राम मंदिर के ख़िलाफ़ फैसला दे दिया तो स्वामी क्या करेंगे. उन्होंने कहा कि ये धारणा ग़लत है कि बहुमत की सरकार जो कुछ भी करेगी वो सही ही होगा. कोई भी संविधान के दायरे में रहकर सरकार फैसला ले सकती है, उससे बाहर नहीं. ओवैसी ने कहा कि राम मंदिर का मसला टाइटल से जुड़ा विवाद है और इस पर क़ानून नहीं बनाया जा सकता है. इसका फ़ैसला अदालत में ही होगा.

मुस्लिम महिलाओं के वोट मिलने के दावे पर ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं ने बीजेपी को वोट नहीं दिया. इसका कोई आंकड़ा नहीं है, अगर हो तो सार्वजनिक करें. अगर मुस्लिम महिलाओं का वोट पाने का दावा किया जा रहा है तो बीजेपी ने किसी मुस्लिम महिला को टिकट तक क्यों नहीं दिया.

जब उनसे पूछा गया कि क्या भविष्य में वो ब्राह्मणवादी दलों से हाथ मिलाएंगे तो ओवैसी ने कहा, “पहले हमें अपनी ताक़त दिखानी होगी तभी तो कोई साथ आएगा.” यूपी में क्या योगी आदित्यनाथ ताक़त दिखाने देंगे? उनका कहना था, “योगी मुख्यमंत्री हैं, कोई ख़ुदा तो नहीं.”

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