तीन तलाक को आपराधिक करार देने वाले मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक (ट्रिपल तलाक) को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को लोकसभा में पेश कर दिया.

लोकसभा में इस बिल का सबसे पहले विरोध आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अध्यक्ष ने किया. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि देश में ऐसा कानून बनाने की जरूरत है जिसमें 20 लाख उन महिलाओं को भी न्याय मिलना चाहिए जो दूसरे समुदाय से आती हैं और उनके पतियों ने उन्हें छोड़ दिया है जिसमें गुजरात वाली भाभी भी शामिल हैं.

ध्यान रहे लोकसभा सांसद ने गुजरात वाली भाभी के रूप में पीएम मोदी की पत्नी जशोदा बेन को लेकर निशाना साधा. दरअसल जशोदा बेन प्रधानमंत्री मोदी से बिना तलाक बीते कई सालों से अलग रहने को मजबूर है.

ओवैसी ने बिल को संविधान के खिलाफ बताते हुए कहा कि अगर यह बिल पास होता है तो यह देश में रहने वाली मुस्लिम महीलाओं के अधिकारों का हनन होगा. यह बिल देश के कानून के बिल्कुल अनुकूल नहीं है. इस्लाम में पहले से ही तलाक और घरेलू हिंसा के कानून लागू हैं ऐसे में केंद्र सरकार को नए कानून लाने की कोई जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि ये बिल मोदी सरकार अपने स्वार्थ के चलते लेकर आई है और उसकी मुस्लिम महिलाओं की मदद करने की बात केवल बहाना है. उन्होंने कहा कि तीन तलाक वैध न होने के समर्थन में तर्क दिया जा रहा है कि कई इस्लामिक देशों में ऐसा है लेकिन इन इस्लामिक देशों में तीन तलाक देना जुर्म नहीं है और न ही इसके लिए सजा मुकर्रर है.

ओवैसी ने कहा कि अगर सरकार वाकई महिलाओं को लेकर, उनके हितों को लेकर गंभीर है तो वो हिंदू परित्यक्ता महिलाओं को लेकर ऐसा कोई कानून क्यों नहीं बनाती.

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