लखनऊ | 2014 में हुए लोकसभा चुनावो के बाद लगभग सभी विधानसभा चुनावो में विकास प्रमुख मुद्दा रहा है. लेकिन जैसे जैसे प्रचार आगे बढ़ता गया, विकास कही पीछे छूट गया और वही पुराने एजेंडा रैलियों में गूंजने लगा. अब पांच राज्यों में विधानसभा चुनावो के लिए मतदान होना है. चुनाव प्रचार पुरे जोरो पर है. इन सभी राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे अहम् राज्य है. यह प्रदेश लोकसभा में 80 सांसद और विधानसभा में 403 विधायक चुनकर भेजता है इसलिए सभी दलों ने उत्तर प्रदेश फतह करने के लिए अपनी जी जान लगा दी है.

बाकी राज्यों की तरह यहाँ भी राजनितिक दलों ने विकास को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया लेकिन अब जैसे जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, सभी पार्टियों के पुराने मुद्दे पोटली से बाहर निकल रहे है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने मंगलवार को राम मंदिर को लेकर जो बयान दिया है उससे तो यही जाहिर होता है की बीजेपी चुनावो में राम मंदिर के मुद्दे को एक बार फिर हवा देने की फिराक में है.

लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए केशव प्रसाद मौर्या ने कहा की बीजेपी की सत्ता में वापसी होते ही भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा. यह आस्था का विषय है, राम मंदिर कोई दो महीने में बनकर तैयार नही होगा. चुनाव बाद सरकार बनते ही राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा. केशव प्रसाद के बयान से साफ़ है की चुनाव में बीजेपी के लिए राम मंदिर फिर से अहम् मुद्दा होगा.

केशव प्रसाद ने समाजवादी और कांग्रेस गठबंधन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा की कांग्रेस का जहाज पहले से ही डूब चुका है जबकि समाजवादी का जहाज डूब रहा है. बीएसपी भी अब इस जहाज को डूबने से नही बचा पायेगी. अखिलेश को दलित एवं पिछड़ा विरोधी बताते हुए केशव प्रसाद ने कहा की मुख्यमंत्री अखिलेश न पिछड़ा वर्ग के साथ है और न ही दलितों के साथ वह केवल धोखा देते है. केशव प्रसाद का इशारा हाई कोर्ट के उस आदेश की और था जिसमे कोर्ट ने अखिलेश के 17 पिछड़ा जातियों को SC में शामिल करने पर रोक लगा दी.


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