नई दिल्ली | बुधवार को जैसे ही आखिरी चरण का मतदान संपन होगा, वैसे ही सभी पार्टियों की निगाहे 11 मार्च को होने वाली मतगणना पर टिक जायेंगी. सभी पार्टी शनिवार का बड़ी बेसब्री से इन्तजार कर रही होंगी क्योकि उसी दिन 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावो का भविष्य भी तय हो जायेगा. यही वजह है की सभी पार्टियों ने इन चुनावो में अपना सब कुछ झोंक दिया.

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावो को लोकसभा चुनावो का सेमी फाइनल माना जा रहा है. इन राज्यों में जिस दल की जीत होगी, आगामी लोकसभा चुनावो में भी उसका भविष्य उज्जवल हो सकता है. खासकर देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में सबसे अहम चुनाव है. कहते है की उत्तर प्रदेश जीतने वाला दिल्ली पर राज करता है. यही कारण है की प्रधानमंत्री मोदी ने यूपी के चुनावो में एक कार्यकर्त्ता की तरह मेहनत की.

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अब सभी को 11 मार्च का इन्तजार है लेकिन ऐसा भी हो सकता है की मतगणना की तारीखों को आगे बढाया जा सकता है. चुनाव आयोग को डर है की होली के कारण हारने-जीतने वाली पार्टीयो के बीच संघर्ष हो सकता है. होली की आड़ में राजनितिक रंजीश निकाली जा सकती है. इसलिए चुनाव आयोग होली के बाद मतगणना कराने की सोच रहा है. हालाँकि अभी तक चुनाव आयोग की तरफ से ऐसी कोई घोषणा नही हुई है.

लेकिन राज्य चुनाव आयोग के अधिकारियो में इस बात की पूरी फुसफुसाहट चल रही है. सोमवार को इस चुनाव अधिकारियो की तरफ से इस तरह की बाते सामने आई है. जब राज्य निर्वाचन कार्यलय से इस बारे में सूचना मांगी गयी तो उन्होंने तिथि में फेरबदल करने सम्बन्धी किसी भी जानकारी से इनकार किया. उधर बुधवार को आखिरी चरण के मतदान के बाद भी उत्तराखंड में गुरुवार को एक सीट के लिए मतदान होगा. उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में उम्मीदवार की मौत के बाद चुनाव रद्द कर दिया गया था.

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