किसानों की कर्जमाफी को फैशन बताकर विवादों में आए केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडू ने हिंदी को राष्ट्रभाषा करार देते हुए नया विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है, इसके इस्तेमाल के बिना हमारी प्रगति असंभव है.

नायडू ने कहा है कि देश में हर कोई अंग्रेजी मीडियम को ही तरजीह देता है. उन्होंने कहा कि मैं बिटिशर्स के खिलाफ हूं, अंग्रेजी भाषा के खिलाफ नहीं हूं. हमें सभी भाषाओं को जानना चाहिए, लेकिन अंग्रेजी सीखते-सीखते हमारी मानसिकता भी बदलने लगती है. ये गलत है, देश के हित में बिल्कुल भी नहीं है.

नायडू के इस बयान पर पलटवार करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि हिंदी को किसी पर थोपा न जाए. उन्होने कहा, हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं है. यह भारत की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है और इसे जानना उपयोगी है. लेकिन हिंदी किसी पर न थोपी जानी चाहिए और न ही थोपी जा सकती है.’

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