बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने शुक्रवार को चुनाव आयोग को बिना दांतों वाला शेर करार देते हुए कहा कि यह एक ‘दंतहीन बाघ’ है. जिसके पास कोई ताकत नहीं है.

उन्होंने कहा कि आयोग ने निर्धारित समय के भीतर चुनावी खर्च के आंकड़ों को जमा न करने वाले राजनीतिक दलों को कभी निरस्त नहीं किया. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल चुनाव प्रचार में काफी पैसा खर्च करती हैं, जिसकी वजह से सामान्य लोग चुनाव लड़ने से पीछे हटते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि चुनाव में काफी पैसा खर्च होता है.

नलसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में ‘‘भारत में राजनीतिक सुधार’’ विषय पर एक व्याख्यान को संबोधित करते हुए वरुण ने कहा, ‘‘सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है चुनाव आयोग की समस्या, जो वाकई एक दंतहीन बाघ है. संविधान का अनुच्छेद 324 कहता है कि यह (चुनाव आयोग) चुनावों का नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण करता है, लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है ?’’

उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव खत्म हो जाने के बाद उसके पास मुकदमे दायर करने का अधिकार नहीं है. ऐसा करने के लिए उसे उच्चतम न्यायालय जाना पड़ता है.’’ बीजेपी सांसद ने कहा कि  2014 के लोकसभा चुनाव के लिए आयोग को आवंटित बजट 594 करोड़ रुपए था, जबकि देश में 81.4 करोड़ वोटर हैं. इसके उलट, स्वीडन में यह बजट दोगुना है जबकि वहां वोटरों की संख्या महज 70 लाख है.

ध्यान रहे वरुण गांधी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बीजेपी गुजरात विधानसभा और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के एक साथ ना कराए जाने को लेकर विपक्ष के हमले झेल रही है. विपक्ष आरोप लगा रहा है कि बीजेपी के ‘दबाव’ डाले जाने के कारण आयोग ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के साथ गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीख घोषित नहीं की.

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