भिवानी। उत्तरप्रदेश के सुल्तानपुर से सांसद व भाजपा नेता वरुण गांधी ने कहा कि देश के सांसदाें को बार-बार अपना वेतन और भत्‍ता बढ़वाने की जगह देश के विकास में योगदान देना चाहिए। उन्‍होंने लोकसभा, विधानसभाओं व अन्‍य सदनों में सांसदों व‍ विधायकों के लिए व्हिप सिस्‍टम पर भी सवाल उठाया। उन्‍होंने कहा कि इसे खत्‍म कर दिया जाए ताे देश का भला होगा।

आदर्श महिला कालेज में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे वरुण गांधी ने मंगलवार को खुलासा किया कि जब उन्होंने सांसदों की संपत्ति और वेतन वृद्धि को लेकर सवाल उठाए तो उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से फोन आया और कहा गया कि आप हमारी मुसीबत क्यों बढ़ा रहे हैं।  वरुण गांधी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री के आभारी है कि उन्होंने इस मुद्दे पर कदम उठाया। अब सांसदों का वेतन केवल हाथ उठाने से नहीं बढ़ेगा, बल्कि संसदीय समिति तय करेगी।

उन्होंने कहा, ‘मैं बार-बार सांसदों के वेतन में वृद्धि और संपत्ति का ब्योरा नहीं देने को लेकर आवाज उठाता हूं। हर वर्ग के कर्मचारी अपनी मेहनत और ईमानदारी के हिसाब से वेतन बढ़वाते हैं लेकिन पिछले 10 सालों में सांसदों ने अपना वेतन सात बार केवल हाथ उठवाकर बढ़वा लिया। मैंने जब यह मुद्दा उठाया तो एक बार पीएमओ से फोन आया कि क्यों आप हमारी मुसीबतें बढ़ा रहे हैं?’

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देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए गांधी ने यूपी के स्कूलों का उदाहरण दिया। उन्होने कहा कि “यूपी के स्कूलों में शिक्षा के अलावा सभी कार्यक्रम होते हैं। उन्होने कहा कि यूपी के स्कूलों में आज धार्मिक व शादी के कार्यक्रम होते हैं, अंतिम संस्कार के बाद की क्रिया यहीं पूरी की जाती है, बच्चे क्रिकेट खेलते हैं और नेता स्कूलों में भाषण देने आते हैं।”

वरूण गांधी ने कहा कि हर साल शिक्षा पर कहने के लिए 3 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन 89 फीसदी पैसा भवनों पर खर्च होता है जिसे शिक्षा नहीं कह सकते। उन्होने कहा कि आज देश में साढे पांच लाख शिक्षकों की कमी है, जिसे देश के सभी पोस्ट ग्रेजुएट एक साल मुफ्त पढा कर एक झटके में पूरा कर सकते हैं।

वरूण गांधी ने कहा कि आज देश में 40 फीसदी किसान ठेके पर जमीन लेकर खेती करते हैं, जो गैरकानूनी है क्योंकि ऐसे किसानों को ना तो सरकार की कोई मदद मिलती, ना ऋण मिलता और ना फसल बर्बाद होने पर मुआवजा मिलता। उन्होने कहा कि पिछले 10 सालों में किसानों की फसलों पर लागत तीन गुना बढी है, जिससे परेशान होकर विदर्भ के 17 हजार किसानों ने आत्मह’त्या की।

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