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राष्ट्रीय लोकदल युवा के प्रदेश सचिव अन्सार सैफ़ी ने प्रेस को जारी अपने बयान में कहा है की जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश सरकार ने केवल धर्म आधारित मान्यता की वजह से इलाहाबाद का नाम प्रयागराज रखा है ये सर्व समाज को साथ लेकर चलने वाले नारे के साथ छल है, इलाहाबाद का नाम प्रयागराज में तब्दील करने में अरबो रुपये का खर्च किया जायेगा

बेहतर तो ये होता के यही अरबो रुपया ज़िले को बेहतर बनाने के लिये किया जाता तो इसकी एक अलग ही तस्वीर पूरे प्रदेश में बनती इन अरबो रुपये से युवाओ को रोज़गार के साधन मुहैय्या कराये जा सकते है किसानों की बेहतरी के लिये उचित फैसले लिये जा सकते थे

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प्रदेश के युवा अपना घर छोड़कर दूसरे राज्यो में रोज़गार करते है उनको अपने ही प्रदेश में लघु उद्योग हेतु और बेहतर नीतिया बनाई जा सकती है लेकिन नही यूपी सरकार की प्रदेश वासियो की बुनियादी ज़रूरतो को दूर करने में कोई खास रुचि नही है, एक तरफ बीजेपी सरकार धर्म ज़ातपात सम्प्रदाय प्रांतीय स्तर को लेकर राजनीति करने को गलत ठहराती है तो वही दूसरी और इनके नेता आए दिन धर्म एवम प्रांत के ऊपर ही राजनीति कर उसे विकास का नाम देते आये है ,

अरबो रुपये खर्च कर ज़िलों का नाम बदल देने से क्या उस ज़िले के वासी आर्थिक रूप से बेहतर हो जायेंगे वहाँ की रोज़ मर्रा की बुनियादी दिक्कते दूर हो जायेगी , सड़कें , साफ सफाई , शिक्षा एवम स्वास्थ्य नीतिया पहले के मुकाबले बेहतर हो जायेगी ?

ये तो भविष्य में वक़्त तय कर ही देगा लेकिन अगर वाक़ई किसी जिले का केवल नाम बदलने से वो जिला बेहतर विकास की ओर अग्रसर हो जायेगा उस जिले उस प्रदेश के युवाओ को रोज़गार मिल जायेगा तो यूपी के बेरोज़गार युवाओ के लिये भी ज़िले का नाम बदलने के साथ साथ बेरोज़गारी शब्द का भी कोई बेहतर नाम रखे

यूपी सरकार ताकि जिस पेट जिस परिवार के खातिर यहाँ के प्रदेशवासी दूसरे प्रदेशो में जाकर अपने लिये रोज़गार ढूंढते है उस राज्य के लोगो एवम नेताओ की गालिया सुनते है उस असहनीय दर्द से भी छुटकारा मिल जाये

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