आगरा | भले ही प्रधानमंत्री मोदी वीआईपी कल्चर को खत्म करने की कितनी भी पैरवी करे लेकिन उनकी ही पार्टी के नेता और सांसद ऐसा करते बिलकुल नही दिखाई देते. वैसे भी देश में वीआईपी की संख्या पिछली सरकार के मुकाबले काफी बढ़ चुकी है. ऐसे में लाजिमी है की ये वीआईपी लोगो को इस बात का भी अहसास कराए की वो वीआईपी है. हालाँकि संविधान में नेता या जनप्रतिनिधि को जनता का सेवक बताया गया है लेकिन चुनाव जीतने और सत्ता हासिल करने के बाद ये बाते हवा हवाई लगने लगती है.

अभी हाल ही में कई ऐसी घटनाए हुए है जहाँ बीजेपी नेताओं या सांसदों ने अपने आप को वीआईपी दर्शाने और दिखाने में कोई कसर नही छोड़ी. एक ऐसी ही तस्वीर रविवार को आगरा में भी देखने को मिली. यहाँ हाल ही में उत्तर प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष नियुक्त किये गए महेंद्र नाथ पाण्डेय टोल मांगने पर टोलकर्मी से भीड़ गए. न केवल उन्होंने बल्कि उनके काफिले में आई किसी भी गाडी ने टोल देने की जहमत नही उठायी.

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इसके अलावा जब महेंद्र नाथ पाण्डेय से इस बारे में पुछा गया तो उन्होंने वीआईपी होने का रोब दिखाते हुए कहा की वो सांसद है और टोल फ्री है. उन पर कोई टोल नही लगता. वैसे भी सरकारे और नेता जनता पर टैक्स लगाना और उनसे वसूलना जानती है. उन पर खुद कभी कोई टैक्स नही लगता. आखिर जनता जो बैठी है टैक्स देने के लिए. बताते चले की महेंद्र नाथ पाण्डेय चंदौली से बीजेपी सांसद है.

उनको हाल ही में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या की जगह प्रदेश का बीजेपी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इससे पहले वो मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री थे. प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद वो पहली बार प्रदेश के दौरे पर आगरा आये थे. इस दौरान उन्होंने टोल कर्मी को टोल देने से मना कर दिया. एएनआई की खबर अनुसार जब उनसे टोल नही देने का कारण पुछा गया तो उन्होंने कहा की आपके पास कोई और सवाल है, मैं सांसद हूं, और मैं टोल फ्री हूं.

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