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तेलंगाना निधानसभा चुनाव में वोटिंग के बाद अब सरकार के गठन के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू कर दी है। बीजेपी का कहना है कि नतीजों के बाद तेलंगाना में अगर त्रिशंकु की स्थिति बनी तो वो टीआरएस का साथ देने के लिए तैयार है। लेकिन टीआरएस ने बीजेपी के इस ऑफर को ठुकरा दिया है।

भाजपा के तेलंगाना अध्यक्ष के. लक्ष्मण ने कहा कि किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में भाजपा टीआरएस का समर्थन करेगी। नतीजों से पहले भाजपा के रुख में आए इस परिवर्तन के लिए एक शर्त भी रखी है। उन्होंने कहा कि टीआरएस को यह साफ करना होगा कि वह कांग्रेस या ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम  का समर्थन नहीं लेगी।

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बीजेपी के इस ऑफर पर टीआरएस प्रवक्ता भानु प्रसाद ने कहा कि हमें किसी के साथ की जरूरत नहीं है, हम अपने दम पर सरकार बना लेंगे। हमें भरोसा है कि हम काफी सीट जीतेंगे। ऐसे में स्पष्ट है कि टीआरएस ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम का साथ ही छोड़ेगी।

इसी बीच कांग्रेस ने भी बड़ी चाल चल दी है। कांग्रेस ने कहा कि उसे भी सरकार बनाने के लिए ऑल इंडिया मज्लिस ए इतेहदुल मुसलिमीन यानि ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ जाने से कोई दिक्कत नहीं है।

कांग्रेस नेता जीएन रेड्डी ने कहा है कि ‘हमारे देश में कोई भी पार्टी परमानेंट दोस्त या दुश्मन नहीं होती, अगर टीआरएस भाजपा के साथ जा सकती है तो ऑल इंडिया मज्लिस ए इतेहदुल मुसलिमीन यानी एआईएमआईएम भी हमारे साथ आ सकती है, अगर वह चाहे तो।’

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