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एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश की खबर को सहानुभूति बटोरने का प्रयास बताया। उन्‍होंने उस पत्र को खारिज कर दिया है, जिसके आधार पर यह कहा गया कि पीएम मोदी की हत्या की साजिश रची जा रही है।

पुणे में एक सभा को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा, “वे कह रहे हैं कि एक धमकी पत्र था। मैंने एक सीआईडी के लिए काम कर चुके एक रिटायर पुलिस अधिकारी से बात की, उन्होंने मुझे बताया कि पत्र में ऐसी कोई बात नहीं थी। पत्र का इस्तेमाल लोगों की सहानुभूति प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, ‘जब एकसमान सोचवाले लोगों ने मिलकर एल्गार परिषद का आयोजन किया तो उन्हें नक्सली कहकर गिरफ्तार कर लिया गया। सब जानते हैं कि भीमा-कोरगांव में हिंसा किसने की लेकिन जिनका इससे कोई संबंध नहीं है, वे गिरफ्तार हो गए। यह सिर्फ सत्ता का दुरुपयोग है बस।’

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गौरतलब है कि भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़काने की साजिश के आरोप में पांच लोग गिरफ्तार किए गए। पुलिस का दावा है कि इन आरोपियों के पास से एक लेटर में बरामद हुआ, जिसमें राजीव गांधी की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने का खुलासा हुआ है। 18 अप्रैल को रोणा जैकब द्वारा कॉमरेड प्रकाश को ये चिट्ठी लिखी गई है।

चिट्ठी में कहा गया कि हिंदू फासिस्म को हराना अब काफी जरूरी हो गया है। मोदी की अगुवाई में हिंदू फासिस्ट काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे में इन्हें रोकना जरूरी हो गया है। इसमें लिखा है कि मोदी की अगुवाई में बीजेपी बिहार और बंगाल को छोड़ करीब 15 से ज्यादा राज्यों में सत्ता में आ चुकी है। अगर इसी तरह ये रफ्तार आगे बढ़ती रही, तो माओवादी पार्टी को खतरा हो सकता है।

शरद पवार के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पुलिस द्वारा जो दस्तावेज बरामद किए गए और उनमें प्रधानमंत्री मोदी जी की हत्या की साजिश की बात आ रही है, उसपर शरद पवार जी संदेह कर रहे हैं।’

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