मुंबई | देश में वन्देमातरम को लेकर सियासी संग्राम मचा हुआ है. कई जनप्रतिनिधियों का मानना है की वन्देमातरम नही गाने वाले देश द्रोही है. इस मुद्दे को लेकर बीजेपी सबसे ज्यादा आक्रमक है. उनके नेताओं की और से आये दिन ऐसे बयान आते रहते है जिससे यह स्पष्ट होता है की वो इसे बड़ा सियासी मुद्दा बनाए रखना चाहती है. अब इस कड़ी में शिवसेना का नाम भी जुड़ गया है. उनका भी मानना है की देश में रहने वालो को वन्देमातरम गाना होगा.

शिवसेना सांसद संजय राउत ने इस मामले में अपनी राय रखते हुए कहा की जो लोग वन्देमातरम नही गाना चाहते उन्हें देश से भगा देना चाहिए. किसी को भी वन्देमातरम से आपत्ति नही होनी चाहिए. दरअसल बीएमसी ने हाल ही में एक प्रस्ताव को पास करते हुए बीएमसी और उसके द्वारा अनुदानित स्कूलो में वन्देमातरम् गाने को अनिवार्य कर दिया. हालाँकि अभी यह आदेश लागू नही होगा क्योकि बीएमसी द्वारा पास किये गए प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री की मोहर लगनी जरुरी है.

मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद बीएमसी का यह फैसला लागु कर दिया जाएगा. हालाँकि विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है. उनका कहना है की आप जबरदस्ती किसी से कुछ नही करा सकते. यह संविधान के खिलाफ है. उधर AIMIM विधायक वारिस पठान ने भी बीएमसी के फैसले पर रोष प्रकट किया. उन्होंने कहा की यह गैरसंवैधानिक है. संविधान में कही नही लिखा गया है की वन्देमातरम गाना अनिवार्य है.

वारिस ने चेताते हुए कहा की अगर इसे हम पर थोपा गया तो इसका अंजाम भुगतना होगा. वही शिवसेना की और से बीएमसी के फैसले की सराहना की गयी. संजय राउत ने कहा की बीएमसी का यह सही कदम है. किसी को भी वन्देमातरम से आपत्ति नही होनी चाहिए. अगर किसी को आपत्ति है तो उसे देश से भगा देना चाहिए. बताते चले की बीएमसी में बीजेपी नगरसेवक संदीप पटेल की और से वन्देमातरम अनिवार्य करने सम्बन्धी प्रस्ताव रखा गया था.

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