Arun Jaitley, India's finance minister, pauses during a news conference in Gurgaon, India, on Saturday, March 5, 2016. India needs strong banks rather than a numerically larger number of lenders, Jaitley says at conclusion of bankers retreat near New Delhi. Photographer: Udit Kulshrestha/Bloomberg via Getty Images

उत्तराखंड मामले में न्यायपालिका के दखल देने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी न्यायपालिका के बढ़ते दायरे पर नाराज़गी जताई है। इससे पहले गडकरी ने भी तंज भरे लहज़े में जजों को इस्तीफ़ा देकर चुनाव लड़ने की नसीहत दी थी। राज्यसभा में जेटली ने कहा कि राजनीतिक समस्याओं का समाधान न्यायपालिका को नहीं करना चाहिए।  उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की इमारत धीरे धीरे गिराई जा रही है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कार्यपालिका और विधायिका में न्यायपालिका के बढ़ते दखल पर चिंता जताते हुए चेताया कि राजनीतिक समस्याओं का निराकरण राजनीतिक तरीके से ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने कार्यपालिका और विधायिका का अतिक्रमण किया है। ऐसे में अब सरकार के पास बजट बनाना और टैक्स लेने का काम ही रह गया है। न्यायपालिका को यह काम भी ले लेना चाहिए।

जेटली ने सूखे के लिए राहत कोष पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद ने विनियोग विधेयक पास कर दिया, हमारे पास एनडीआरएफ है, राज्यों में एसडीआरएफ हैं। अब विनियोग विधेयक पास हो गया तो मैं कहां से अलग से फंड लाऊं। दरअसल बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सूखे को लेकर राज्य सरकारों को फटकार लगाई और केंद्र को सूखे पर एसटीएफ बनाने का निर्देश दिया।

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