भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने शनिवार को कश्मीर को लेकर बयान जारी कर कहा कि कश्मीर में पत्थरबाजी करने वाले सभी लोगों को देशद्रोही की तरह नहीं देखा जाना चाहिए. बयान में पार्टी की और से कश्मीर में शांति के लिए सभी पक्षों से बातचीत करने पर जोर दिया.

केंद्र सरकार से जम्मू एवं कश्मीर में सभी पक्षों के साथ बातचीत का रास्ता खोलने का अनुरोध करते हुए बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के सुझाव की भी सराहना की.

भाकपा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि नागरिकों को अलग-थलग करने का नतीजा हम हालिया श्रीनगर संसदीय उप-चुनाव में मतदाताओं द्वारा चुनाव का बहिष्कार करने के रूप में देख चुके हैं और पार्टी का मानना है कि इससे जम्मू एवं कश्मीर में ‘स्थिति और गंभीर हुई है’.

भाकपा ने कहा, “इसका महज कानून एवं व्यवस्था की समस्या के तौर पर समाधान नहीं निकाला जा सकता. जमीनी सच्चाई को स्वीकार करने की जरूरत है. सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायधीश द्वारा जम्मू एवं कश्मीर बार एसोसिएशन से पत्थरबाजी बंद करवाने की गारंटी देने के लिए कहना व्यावहारिक नहीं है.”

भाकपा का कहना है, “स्थिति पर किसी एक संगठन का नियंत्रण नहीं रह गया है, चाहे वह अलगाववादी ही क्यों न हों. बातचीत की सामान्य घोषणा करने से कुछ मदद मिल सकती है. सरकार का यह रुख सही नहीं है कि वह सिर्फ मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों से बातचीत करेगी.”

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