पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्‍बल ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एनडीए के लिए जीडीपी का मतलब गैस, डीजल और पेट्रोल की महंगाई बढ़ाना है तो दूसरी ओर आम आदमी की जेब से टैक्स वसूल कर उद्योगपतियों को और अमीर बनाना है.

सिब्बल ने कहा, ‘वे कहते थे कि हमारी जीडीपी बढ़ेगी. इस वृद्धि का असली मतलब गैस, डीजल और पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि से है. यही जीडीपी है.’ उन्होंने कहा कि 50 हजार करोड रुपए के प्रोत्साहन पैकेज की तैयारी से साफ है कि सरकार को भी अर्थव्यवस्था की सुस्ती में उसे आर्थिक वियाग्रा का डोज देने का अहसास हो गया है. उन्होंने कहा, “साढ़े तीन साल बाद यदि अर्थव्यवस्था की यह स्थिति है, तो देश कहां जाएगा?

उन्होंने तेल की कीमतों को लेकर कहा कि एक लीटर कच्चे तेल की कीमत लगभग 21 रुपये है और इसे रिफाइन करने के बाद इसकी लागत लगभग 31 रुपये होगी. सरकार या पेट्रोलियम कंपनियों की लागत 31 रुपये और बिक्री 79 रुपये में (मुंबई की दर). वे हरेक लीटर पर 48 रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं.’

सिब्बल बोले, ‘यह बोझ कौन उठाता है, आम नागरिक – वे लोग जो मोटरसाइकिल से चलते हैं, जो अपनी कार खुद चलाते हैं और वे किसान, जो डीजल का इस्तेमाल करते हैं. मुनाफा सरकार के पास जाता है और बोझा किसानों के सिर. आम आदमी का बोझ कम करने के बजाए वे उसका बोझ और बढ़ाते जा रहे हैं और उनके मंत्री कहते हैं ‘पेट्रोल कौन खरीदता है…जिसके पास कार है और निश्चित रूप से वह भूखा नहीं है.

सिब्बल ने कहा, “इस सरकार के घमंड और आचरण को तो देखिए.” उन्होंने कहा, वे देश के उन एक प्रतिशत लोगों पर कर क्यों नहीं लगाते, जिनके पास देश की 58 प्रतिशत संपत्ति है. संप्रग शासन के दौरान यह 30 प्रतिशत थी. गरीब और गरीब होते जा रहे हैं और धनी और धनी बनते जा रहे हैं.

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