Thursday, September 23, 2021

 

 

 

बहरीन में राहुल का मोदी पर निशाना – खतरे में है देश, लोगों को जाति-धर्म पर बांट रही सरकार

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rahu in bah

अपने एक दिवसीय दौरे पर बहरीन पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को निशाने पर लेते हुए कहा कि आज देश खतरे में है. सरकार लोगों को धर्म और जाति के आधार पर बांट रही है. उन्होंने प्रवासी भारतीयों से देश की हिफाजत करने की अपील की.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मैं आपको बताना चाहता हूं कि आप देश के लिए क्या अहमियत रखते हैं. आप देश के लिए महत्वपूर्ण हैं. देश इस समय संकट में है और आप देश की मदद कर सकते हैं. उन्होंने कहा, रोजगार सृजन के मामले में देश आठ साल पीछे है. रोजगार सृजन करने, विश्व स्तर की शिक्षा व्यवस्था करने और गरीबी दूर करने की जगह हम नफरत फैलाने और देश को बांटने का काम कर रहे हैं.

इस दौरान राहुल ने जजों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला भी उठाया. उन्होंने कहा, ”दुख है कि हमारे देश में असली समस्याओं पर बात नहीं हो रही है. बात इस पर हो रही है कि क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए. एक्टिविस्ट और पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से काम करने की क़ीमत चुकानी पड़ रही है. किसी ख़ास धार्मिक आस्था के होने के कारण लोगों को मारा जा रहा है. संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे जजों की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हो रही है. इतना कुछ हो रहा है लेकिन सरकार ख़ामोश है.”

राहुल ने कहा, ”आज भारत में जो सरकार है वो लोगों को रोज़गार नहीं दे पा रही है.” कांग्रेस प्रमुख ने कहा, ”हमारा मुख्य प्रतिद्वंद्वी चीन हर 24 घंटे में 50 हज़ार रोज़गार पैदा कर रहा है जबकि भारत 400 नौकरियां ही पैदा कर रहा है. मतलब जिस काम को चीन दो दिन में कर रहा है, उसे करने मे भारत को दो साल लग रहे हैं. यह मेरा आंकड़ा नहीं है बल्कि यह भारत सरकार का आंकड़ा है.”

राहुल ने कहा, ”नौकरी पैदा करने में भारत पिछले आठ सालों में सबसे निचले स्तर पर आ गया है. नए निवेश के मामले में भारत पिछले 13 सालों में निचले स्तर पर आ गया है. नोटबंदी के फ़ैसले के कारण दुनिया भर के भारतवंशियों की कमाई को चोट पहुंची है. भारत की आर्थिक विकास की गति थम गई है. भारत इन नीतियों के सहारे आगे नहीं बढ़ सकता. हमारा देश दुनिया में दूसरा सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश है.”

कांग्रेस प्रमुख ने कहा, ”हर दिन 30 हज़ार युवा भारत के जॉब मार्केट में आ रहे हैं. नौकरी पैदा नहीं होने से लोगों में ग़ुस्सा है और इस महसूस भी किया जा रहा है. युवक सवाल पूछ रहे हैं कि उनके भविष्य का क्या होगा. जहां हमें नौकरी पैदा करने और विश्व स्तरीय शिक्षा की व्यवस्था करने पर काम करना चाहिए था वहां नफ़रतें फैलाई जा रहीं हैं. अलग-अलग समुदायों के बीच खाई पैदा की जा रही है.”

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