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पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस नेता शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’ के बयान को लेकर निशाने पर लिया है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कथन न खाऊंगा और न ही खाने दूंगा सिर्फ गोमांस पर ही लागू हो पाया है। इसके अलावा देश भर में मौजूदा सरकार अन्य किसी भी विषय को पूरा करने में असफल रही है।

कसौली में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दूसरे दिन आयोजित सत्र हिंदू थुरिज्म ऑन हिंदूज्म को संबोधित कर रहे थरूर ने कहा, मोदी सरकार ने गोमांस पर प्रतिबंध को लेकर कार्यकाल के चार साल निकाल दिए हैं। इसके अलावा कोई बड़ी उपलब्धि केंद्र सरकार के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को दूसरी पारी खेलने का अवसर देने की कोई वजह नहीं रह गई है।

उन्होने कहा, मोदी सरकार के निर्णयों से अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। देश की आजादी के बाद असहिष्णुता के 97 प्रतिशत मामले पिछले चार साल में ही सामने आए हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग गली मोहल्ले में निकलने से डर रहे हैं। नरेंद्र मोदी लहर खत्म हो चुकी है और देश के लोग अब नरेंद्र मोदी को दूसरी बार प्रधानमंत्री बनते नहीं देखना चाहते हैं।

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अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण पर चर्चा करते हुए थरूर ने कहा कि हिन्दू चाहता कि राम मंदिर बने लेकिन यह मस्जिद को गिराकर नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए। अभी यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। थरूर में इस मामले में कांग्रेस के स्टैंड को स्पष्ट तो नहीं किया लेकिन संकेत दिया कि कांग्रेस भी राम मंदिर के खिलाफ नहीं ।

राफेल इतिहास के रक्षा सौदे का सबसे बड़ा घोटाला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नारा लगाते थे कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा। राफेल डील पर क्यों चुप्पी साधे हुए हंै। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में किसानों ने सबसे ज्यादा आत्महत्या की है। मोदी सरकार के नोटबंदी व जी.एस.टी. के गलत फैसलों से भारत की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। सरकार की गलत नीतियों का नतीजा है कि देश में पैट्रोल व डीजल की कीमतें अनियंत्रित हो गई हैं।

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