नयी दिल्ली। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज कहा कि आतंकवाद की समस्या तब और भयावह हो जाती है जब देशों की सरकारें उसका समर्थन करती हैं और उसे प्रायोजित करती हैं। उनका इशारा पाकिस्तान की ओर था।

रायसीना संवाद को संबोधित करते हुए सुषमा ने कहा कि आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं करने का रवैया जरूरी है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की समस्या कहीं भी समाजों को आतंकित कर सकती है और डिजिटल युग में समस्या और अधिक विकराल है।

सुषमा ने कहा कि ‘सभी समस्याओं की जननी’ आतंकवाद और परमाणु प्रसार पर बिखरे तरीके से प्रभावशाली रूप से ध्यान नहीं दिया जा सकता। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिये बिना कहा कि सरकारों द्वारा समर्थित और प्रायोजित आतंकवाद और अधिक खतरनाक है।

आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट का उदाहरण देते हुए स्वराज ने कहा, ‘दरअसल आतंकवाद राज्य प्रायोजित होता है और राज्यों की ओर से सक्रिय सहयोग मिलता है जोकि खतरनाक है।’
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के प्रति आज जीरो टॉलरेंस की जरूरत है। भारी विनाश के हथियार के संबंध में उन्होंने कहा, ‘भारी विनाश के हथियार, खासतौर से परमाणु बम के इस्तेमाल के पक्ष में दी जा रही दलीलों से बढ़ते खतरों को नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए।’

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