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गुवाहाटी: असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने मंगलवार को एनआरसी ड्राफ्ट को लेकर कहा कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (NRC) वास्तव में कांग्रेस लेकर आई थी। हालांकि उन्होने ये भी कहा कि इस सूची से बाहर किये गए 40 लाख लोगों में से अधिकतर भारतीय हैं।

इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में गोगोई ने कहा, ‘यह (NRC) तो हमारा बच्चा है। हमने इसे मनमोहन सिंह के कार्यकाल में शुरू किया था। इसके पीछे उद्देश्य यह पहचान करना था कि कौन विदेशी है और कौन वास्तव में भारतीय नागरिक। इसमें किसी धर्म से जोड़ने जैसी कोई बात ही नहीं थी। लेकिन जो अंतिम सूची प्रकाशित हुई है, वह खामियों से भरी है। इसकी वजह से 40 लाख लोगों का भविष्य अनिश्चित हो गया है। यह कोई छोटी संख्या नहीं है। हम चाहते हैं कि इसमें सुधार किया जाए।’

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गोगोई ने कहा,‘जिन लोगों के नाम इसमें नहीं हैं सरकार को उन्हें कानूनी मदद देनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी की तरफ से हम हर संभव तरीके से उनकी मदद करने जा रहे हैं। इन लोगों को विदेशी मानना सही नहीं है’ उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा विदेशी घोषित किए गए कई लोगों के नाम इसमें शामिल कर लिया गया है जबकि विदेशियों के लिये बनाए गए हिरासत शिविरों में रह रहे कुछ लोगों के नाम इस सूची में है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बीजेपी के लोग इसमें राजनीति कर रहे हैं और इस मसले को हिंदू-मुस्लिम बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होने कहा, यह कहना मुश्किल है कि कितने विदेशी हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक असम में सिर्फ 2.48 लाख ‘डी वोटर्स’ यानी संदिग्ध मतदाता हैं।

बता दें कि असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का दूसरा ड्राफ्ट सोमवार को जारी किया गया। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया शैलेख ने सोमवार को बताया कि 2 करोड़ 89 लाख 83 हजार छह सौ सात लोगों को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में योग्य पाकर उन्हें शामिल किया गया है और 40.07 लाख आवेदकों को इसमें जगह नहीं मिली है।

शैलेश ने कहा कि जिन लोगों का नाम इस सूची में शामिल नहीं है उन्हें पर्याप्त मौका दिए जाएगा ताकि वह अपने दावे और विरोध दर्ज करा सकें।

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