‘वंदे मातरम पर सबसे पहले टैगोर ने जताई थी आपत्ति तो जिन्ना ने पूरा गाया था’

11:27 am Published by:-Hindi News

वंदे मातरम को लेकर राजीव गांधी की सरकार में मंत्री रहे आरिफ मोहम्मद खान ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि सबसे पहले इस गीत पर राष्ट्रगान के रचियता रवीन्द्र नाथ टैगोर ने आपत्ति जाहीर की थी तो दूसरी और पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना ने इस को पूरा गाया था।

उन्होंने कहा, “रफी अहमद किदवई का स्टेटमेंट है कि मोहम्मद अली जिन्ना ने मेरे बगल में खड़े होकर वंदे मातरम गाया था लेकिन जब अलग पाकिस्तान की मांग करने लगे तो उन्हें वंदे मातरम में दोष नजर आने लगा।”

खान ने कहा, “वंदे मातरम पर जब गुरुदेव ने ऐतराज जताया तो एक कमेटी बनाई गई। उस कमेटी ने काबिल-ए-एतराज हिस्से को राष्ट्र गीत से निकाल दिया। जो हिस्से बचे उसे खुद टैगोर ने कम्पोज किया और बनारस के कांग्रेस अधिवेशन में उनकी भतीजी या भांजी ने गाया। जब एंकर ने कहा कि जो चीज मुस्लिम समुदाय को नागवार लगती है, वह आपको पसंद आती है तो खान ने पूछा कि बताओ वंदे मातरम में क्या काबिल-ए-एतराज है?

खान ने बताया कि उन्होंने वंदे मातरम का अनुवाद किया था और फतवा जारी करने वाले मौलवी नदवी को भिजवाया था कि कोई ये जाकर कहे कि ये एक गाना है वंदे मातरम का अनुवाद नहीं। इसके वाद उस अनुवाद पर कोई ऐतराज नहीं जताया गया क्योंकि उसमें कुछ भी आपत्तिजनक था ही नहीं। खान ने कहा कि वंदे मातरम में भी कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है।

खान ने बाद में वंदे मातरम का किया हुआ अनुवाद भी बताया। जो इस प्रकार है –

तस्लीमात, मां तस्लीमात।
(अर्थात् मां तुझे सलाम, मां तुझे सलाम।)
तू भरी है मीठे पानी से,
फल-फूलों की शादाबी से,
दखिन की ठंडी हवाओं से,
फसलों की सुहानी फिजाओं से,
तस्लीमात, मां तस्लीमात। 

तेरी रातें रोशन चांद से,
तेरी रौनक सब्जे खाम से,
तेरी प्यार भरी मुस्कान है,
तेरी मीठी बहुत जुबान है,
तेरी बाहों में मेरी राहत है,
तेरी कदमों में मेरी जन्नत है।
तस्लीमात, मां तस्लीमात।

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