अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे हमलों को रोकने में बांगलादेश ने कामयाबी हासिल की है। जिसको लेकर भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संतोष व्यक्त किया है।

गुरुवार को राज्यसभा में सुषमा स्वराज ने एक पूरक सवाल के जवाब में कहा कि बांग्लादेश में साल 2010 में हिंदुओं की आबादी 8.4 प्रतिशत थी जो 2017 में बढ़कर 10.7 प्रतिशत हो गई। स्वराज ने कहा कि इन घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिये भारत सरकार संबद्ध देशों की सरकारों के साथ लगातार संपर्क में है।

बांग्लादेश में जनसांख्यकीय बदलाव के अंदेशे पर उन्होने कहा कि बांग्लादेश सरकार के आधिकारिक आंकड़ों में हिंदू आबादी में इजाफा होना इस आशंका को निराधार साबित करता है।

उन्होंने पाकिस्तान में दलित हिंदुओं पर अत्याचार की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर भारत में उनके पलायन और नागरिकता की मांग से उत्पन्न समस्या से जुड़े पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक इस समस्या का समाधान है। स्वराज ने कहा कि पलायन कर भारत आये ऐसे लोगों को नागरिकता प्रदान कर इस समास्या का स्थायी समाधान किया जा सकता है।

ऐसे में अब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करने वाली मोदी सरकार पर देश के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे है। एक यूजर ने कहा कि सुषमा स्वराज को बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं की तो फिक्र है लेकिन देश में मारे जा रहे मुस्लिम अल्पसंख्यकों से कोई लेना देना नहीं है।

तो वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि विदेशमंत्री की नजर में भारतीय अल्पसंख्यकों से बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों की अहमियत ज्यादा है। क्योंकि उनके दम पर ही भारत में बीजेपी को बहुसंख्यकों के वोट मिलेंगे।