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पटना : अयोध्या विवाद पर मचे घमासान के बीच बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि मस्जिद तो कहीं भी बन सकता है, लेकिन मंदिर तो वहीं बनेगा जहां रामलला विराजते हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तो मंदिर निर्माण के पक्ष में पैसला 2010 में ही दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट भी जल्द निर्णय ले। यह करोड़ों हिंदुओं के आस्था का सवाल है। मंदिर निर्माण के वादे को हम भूल नहीं सकते यह हमारी प्राथमिकता में है। राम मंदिर को तोड़कर वहां बाबरी मस्जिद का निर्माण हुआ था।

डिप्टी सीएम ने कहा कि कोर्ट का यह कहना कि राम मंदिर पर कोई जल्दीबाजी नहीं है। देश यह जानना चाहता है कि 29 नवंबर को सुनवाई क्यों नहीं हुई। कर्नाटक मामले में कोर्ट रात को एक बजे निर्णय दे सकता है, लेकिन राम मंदिर पर कोई निर्णय नहीं हो रहा। धारा 377 पर कोर्ट निर्णय ले सकता है लेकिन राम मंदिर के लिए समय नहीं है। न्यायपालिका और कार्यपालिका को इसपर जल्द फैसला लेना चाहिए।

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सुशील मोदी ने अपने भाषण में न केवल सर्वोच्च न्यायालय को करोड़ों हिंदुओं की जन भावना के अनुरूप फ़ैसला देने का सुझाव दिया, बल्कि मुस्लिम समाज के लोगों को भी ये सलाह दी कि उस जगह पर मस्जिद बनाने की ज़िद छोड़ दीजिए, क्योंकि मस्जिद कहीं भी बन सकता है, लेकिन राम मंदिर कहीं और नहीं बन सकता. क्योंकि राम का जन्मस्थान वहीं है।

वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सुशील मोदी ने कहा कि कांग्रेस को राम मंदिर पर अपना मत स्पष्ट करना चाहिए। कोर्ट जन भावना को समझे। उन्होंने उम्मीद जतायी कि कोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में होगा।  उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने यह बात भारत को एकता के सूत्र में बांधने वाले महान नेता सरदार वल्ल्भ भाई पटेल की जयंती पर पटना में आयोजित कार्यक्रम में कही।

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