Tuesday, January 25, 2022

मोदी सरकार पर भड़के सुब्रमण्यम स्वामी – वित्तमंत्री को अर्थव्यवस्था का ज्ञान ही नहीं…

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नई दिल्ली: भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य सुब्रह्मण्यम स्वामी ने बुधवार को कहा कि सरकार ने पिछले पांच सालों में मैक्रो-इकोनॉमिक प्रणाली को गड़बड़ कर दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में मांग पैदा करने के लिए सरकार को आयकर खत्म करना चाहिए था, क्योंकि कॉरपोरेट कर घटाने से अर्थव्यवस्था को कोई लाभ नहीं होगा।

पूर्व केंद्रीय कानून और वाणिज्य मंत्री स्वामी ने अपनी ताजा किताब ‘रीसेट – रिगेनिंग इंडियन्स इकॉनॉमिक लीगेसी’ लांच की और भारत की अर्थव्यवस्था पर बात की। उन्होंने इसे वापस गति देने के तरीके भी सुझाए। स्वामी के इस किताब का विमोचन पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने किया।

भाजपा सांसद ने अपने विचार सुझाते हुए कहा कि आज बेरोजगारी की उच्चतम दर को पूर्व गर्वनर रघुराम राजन के कार्यकाल के दौरान लागू की गई नीतियों को कार्यान्वित कर नीचे लाया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘रघुराम राजन को हर कोई बहुत योग्य मानता था। मगर वह महज एक अर्थशास्त्री नहीं थे बल्कि वह एक वित्त (व्यक्ति) भी थे। अर्थशास्त्र में भी, यह मैक्रोइकॉनॉमिक्स था जिसे समझना महत्वपूर्ण था। रघुराम राजन का मानना है कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाना होगा।’

उन्होंने आगे कहा कि लेकिन इससे पूंजी की लागत बढ़ी औ कगार पर मौजूद कंपनियां ढह गईं। यही कारण है कि आज हम बढ़ी हुई बेरोजगारी दरें देख रहे हैं। स्वामी ने इस दौरान मोदी सरकार पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अज्ञानी या सच बोलने की हिम्मत नहीं रखने वालों का जमावड़ा रखा है।

इसके पहले अपनी किताब के बारे में अपनी बात रखते हुए स्वामी ने कहा, ‘हमें हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक नई शुरुआत की जरूरत है। हमने मैक्रो वृद्धि स्तर पर परफार्म नहीं किया। बचत को सही तरह से इस्तेमाल नहीं किया गया। यदि हमें बेरोजगारी समाप्त करनी है तो देश को अगले 10 वर्षो तक 10 प्रतिशत विकास दर की जरूरत।’

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