उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा मुजफ्फरनगर और शामली के दंगों से जुड़े हिन्दू आरोपियों से केस वापस लेने पर आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भड़क उठे है.

ओवैसी ने कहा कि यह हिन्दुत्व तुष्टिकरण है. उन आरोपियों में कई बीजेपी के सांसद और एमएलए भी थे. उन्होंने कहा कि संविधान और IPC का मजाक उड़ाया जा रहा है. सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ कदम उठाना चाहिए जिनकी वजह से 50 हजार लोग शरणार्थी बन गए.

ओवैसी ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट बनाए जाने की बात कही लेकिन ये लोग स्पेशल कोर्ट बनने से पहले इन लोगों को बचाना चाहते हैं. दूसरी बात यह है कि बीजेपी हमेशा मुस्लिम तुष्टीकरण की बात करती है. ये हिंदुत्व तुष्टिकरण है. उत्तर प्रदेश में रूल आॅफ लॉ नहीं, रूल आॅफ रिलीजन है। उन्होंने कहा कि बीजेपी उन तमाम लोगों को बचाना चाहती है, जिनकी वजह से 50 हजार लोग बेघर हो गए.’

वहीँ सपा के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव ने कहा कि सरकार ने दंगा पीड़ितों के लिए कुछ नहीं किया. योगी सरकार केस वापसी सिर्फ वोट बैंक साधने के लिए कर रही है. कांग्रेस नेता पी एल पुनिया ने कहा कि मुजफ्फरनगर के दंगों में शामिल लोगों को योगी सरकार के एक साल पूरे होने का गिफ्ट मिला है, जो सरकार केस को वापस ले रही है लेकिन हमें अदालत पर भरोसा है. हम अपना विरोध जारी रखेंगे.

जेडीयू नेता केसी त्यागी ने केस वापसी पर कहा कि जो मामले अदालत में विचाराधीन है, उनको वापस लेना ठीक नहीं है. केस वापसी पर एनसीपी नेता माजिद मेमन ने कहा कि राज्य को अधिकार है कि स्टेट हारमनी में केस वापस ले ले लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि राजनैतिक हथियार के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाए.

इस मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जो दोषी हैं, उनके मुक़दमे वापस नहीं लिए जा रहे हैं. दोषियों को सजा मिलनी चाहिए. राजनैतिक द्वेष के चलते दर्ज किए गए मुकदमे वापसी करने में कुछ गलत नहीं है.

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