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अयोध्या विवाद में सुलह-समझौते के नाम पर राम मंदिर निर्माण के लिए बाबरी मस्जिद की जमीन हासिल करने में जुटे श्रीश्री रविशंकर को मुस्लिमों को धमकाना महंगा पड़ सकता है. मुस्लिम नेताओं ने एक सुर में सुप्रीम कोर्ट से तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है.

आल इंडिया यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल कासमी ने श्री श्री रविशंकर के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने पहले बाबरी मस्जिद से हाथ धोने के लिए मुसलमानों को बहलाने और फुसलाने की कोशिश की.

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मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने कहा, श्री श्री रविशंकर जब मुस्लिमों को बहलाने और फुसलाने में नाकाम हो गए तो लोगों को धमकाने और देश में नफरत की माहौल तैयार करने पर उतर आए. जो बेहद चिंताजनक है. मौलाना ने कहा कि भारत के मुसलमान और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीअत उलेमा ए हिन्द ने साफ़ तौर पर कह दिया है कि बाबरी मस्जिद और राम मंदिर के मुद्दे में सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आयेगा वह उन्हें कुबूल होगा.

उन्होंने कहा कि इस विवाद का हल सुप्रीम कोर्ट के जरिए ही संभव है. ऐसे में श्री श्री का यह कहना कि सुप्रीम कोर्ट का फैसले से भारत में सीरिया जैसी हालात पैदा होंगे. यह बेहद चिंताजनक है.

ध्यान रहे श्रीश्री रविशंकर ने मुस्लिमों का धमकाते हुए कहा था कि अगर मुस्लिमों ने बाबरी मस्जिद की जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए नहीं सौंपी तो भारत सीरिया बन जायेगा.

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