नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख अबू आजमी ने बुधवार को विधानसभा में बाबरी मस्जिद पर दिए गए बयान पर कड़ी नाराजगी जताई।  उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना करते हुए मुस्लिम मंत्रियों के इस्तीफे की मांग तक कर डाली।

दरअसल ठाकरे ने अपने बयान में कहा था कि जब बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ था उस समय वे सब वहां से भाग खड़े हुए थे। तब शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने कहा था, अगर इस घटना में शिव सैनिक शामिल हैं, तो उन्हें इस पर गर्व है। आज हिंदुत्व की बात करने वाले बताएं कि उस समय हिंदुत्व कहां चला गया था जब जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ मिलकर भाजपा ने सरकार बनाई थी?

आजमी ने कहा, ‘मुख्यमंत्री को ध्यान रखना चाहिए कि महाराष्ट्र की सरकार एक सेक्यूलर सरकार है, सिर्फ शिवसेना की सरकार नहीं हैं। इसीलिए यहां हिंदु-मुस्लिम की बात नहीं होनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद का विध्वंस को एक आपराधिक कृत्य कहा था। आजमी ने कांग्रेस और एनसीपी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘इन दलों ने अतीत में मुसलमानों को शिक्षा और नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही थी, लेकिन अब तक नहीं दिया। कम से कम मुस्लिम मंत्रियों को तो शर्मिंदगी महसूस होनी चाहिए और ठाकरे के बयान और आरक्षण के मुद्दे पर उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।’

सपा नेता ने कहा कि राज्य की महाविकास अघाडी सरकार बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने के लिए बनी थी और कांग्रेस तथा एनसीपी ने उसे न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) पर सहमति के आधार पर समर्थन दिया था। उन्होंने कहा, ठाकरे ने कहा था कि वह महाराष्ट्र में सीएए-एनआरसी लागू नहीं करेंगे। कांग्रेस-एनसीपी ने कहा था कि राज्य में मुस्लिमों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण लागू करेंगे, अब वे सत्ता में हैं। उन्हें कदम उठाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि ठाकरे सरकार में असलम शेख (कांग्रेस), नवाब मलिक और हसन मुश्रीफ (एनसीपी) कैबिनेट मंत्री हैं। अब्दुल सत्तार (शिवसेना) राज्य मंत्री हैं।