लखनऊ | उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावो के परिणाम आने में अब 48 घंटो से भी कम का समय बचा है. ऐसे में सभी दल अपनी अपनी जीत के दावे कर रहे है. लेकिन एग्जिट पोल के नतीजो से कहा जा सकता है की उत्तर प्रदेश में इस बार त्रिशंकु विधानसभा रहने के आसार ज्यादा है. लेकिन इतना तय माना जा रहा है की बीजेपी प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है. ऐसे में क्या बीजेपी को रोकने के लिए क्या दो कट्टर दुश्मन हाथ मिला सकते है?

जी हाँ , हम समाजवादी पार्टी और बसपा की बात कर रहे है. हालाँकि अभी केवल एग्जिट पोल के नतीजे है जो केवल अनुमान है, नतीजे नहीं. लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीती में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के एक बयान ने खलबली मचा दी है. बीबीसी हिंदी के साथ बात करते हुए अखिलेश यादव ने मायावती के साथ गठबंधन की संभावनाओं से इनकार नही किया है.

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अखिलेश से जब पुछा गया की किसी को भी बहुमत न मिलने की स्थिति में क्या आप मायावती के साथ गठबंधन करोगे? इस सवाल के जवाब में अखिलेश ने कहा की पहले तो प्रदेश में सपा-कांग्रेस गठबंधन की सरकार बन रही है. हमें प्रदेश के हर वर्ग ने वोट दिया है. हमने काम बोलता है के नाम पर वोट मागने जबकि मोदी जी राज्य की जनता को एक काम नही बता सके.

दोबारा पूछने पर उन्होंने कहा की मायावती जी को मैंने हमेशा एक रिश्ते के साथ बुलाया है. हाँ अगर सरकार बनाने के लिए जरुरत पड़ी तो देखिये.. ये तो कोई नही चाहेगा की सूबे में राष्ट्रपति शासन लगे और बीजेपी रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाये. हालाँकि अखिलेश ने जोर देकर कहा की वैसे ऐसी स्थिति नही आएगी और हम स्पस्ट बहुमत के साथ सरकार बनायेंगे. अखिलेश के बयान के बाद क्या उत्तर प्रदेश की राजनीती में इस बार ऐसा होने जा रहा है जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो. चलिए देखते है..

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