Friday, September 24, 2021

 

 

 

सपा-बसपा गठबंधन मुस्लिम राजनीति को खत्म करने की साजिश: मौलाना आमिर रशादी

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लखनऊः 2019 लोकसभा चुनावों को लेकर सपा-बसपा गठबंधन की घोषणा कर दी गई है। मुस्लिमों को नजरअंदाज करने को लेकर महागठबंधन की तीखी आलोचना हो रही है।

राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने लखनऊ में एक प्रेस वार्ता कर गठबंधन को मुसलमानों के लिए ‘ठगबंधन‘ करार दिया। प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए मौलाना रशादी ने कहा कि, ‘सेकुलरिस्म के नाम पर बने इस तथाकथित गठबंधन में सबसे ज़्यादा अगर कोई खुद को ठगा महसूस कर रहा है तो वो मुस्लिम समाज है क्योंकि दशको से मुस्लिम समाज ने परम्परागत तरीके से सपा-बसपा को वोट दिया है और 70 सालों से सेकुलरिज़्म लगातार सेकुलरिस्म की बुनियाद को मजबूत किया है परंतु इस गठबंधन से मुस्लिम नेतृत्व वाले दलों को दूर रखना न केवल सपा-बसपा का मुस्लिम नेतृत्व वाले दलों के प्रति राजनैतिक दुर्भावना है बल्कि समाजिक न्याय के मूल्यों के भी विरुद्ध है।’

उन्होंने कहा कि सपा-बसपा गठबंधन मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व को खत्म करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि अगर गठबंधन को मुस्लिम समाज का वोट चाहिए तो उन्हें 16 सीटों की हिस्सेदारी भी दें। वे मंगलवार को हीवेट रोड स्थित ओलमा कौंसिल के दफ्तर में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि सियासी दल सेकुलरिज्म के नाम पर मुस्लिम समाज को हमेशा गुलाम बनाए रखना चाहती है। मुसलामानों ने परंपरागत तरीके से सपा-बसपा को वोट दिया है और सेकुलरिज्म की बुनियाद को मजबूत किया है। इसके बावजूद मुस्लिम नेतृत्व वाले दलों को गठबंधन से दूर रखना उनके प्रति दुर्भावना हैं।

रशादी ने कहा कि अगर गठबंधन में मुस्लिम नेतृत्व वाले दलों को शामिल नहीं किया जाता तो वे समान विचारधारा वाले दलों के साथ तीसरा विकल्प तैयार करेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर शिवपाल यादव बात करेंगे तो उनसे बात की जा सकती है।

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