Tuesday, July 27, 2021

 

 

 

सपा-बसपा का टूट सकता है गठबंधन, मायावती बोली – मुसलमानों ने पूरा साथ दिया, यादव वोट नहीं मिले

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दिल्ली/लखनऊ. बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को दिल्ली में लोकसभा चुनाव के नतीजों की समीक्षा की। सोमवार को उत्तर प्रदेश के पार्टी पदाधिकारियों और सांसदों के साथ बैठक में मायावती ने कहा कि सपा से गठबंधन का फायदा नहीं हुआ। हमें यादवों के वोट नहीं मिले। बसपा को जिन सीटों पर कामयाबी मिली उसमें सिर्फ पार्टी के परंपरागत वोटबैंक का ही योगदान रहा।

बैठक में मायावती ने कहा- सपा के साथ गठबंधन सोच-समझ कर किया था। हम अपने नफे-नुकसान को जानते थे, लेकिन इस गठबंधन से कोई फायदा नहीं हुआ। यादव वोट बसपा को ट्रांसफर नहीं हुए। वोट मिलते तो यादव परिवार के लोग नहीं हारते। सपा के लोगों ने गठबंधन के खिलाफ काम किया है। मुसलमानों ने हमारा पूरा साथ दिया।

उन्होने कहा, शिवपाल यादव ने यादव वोटों को बीजेपी में ट्रांसफर करा दिया। सपा इसे रोक नहीं पाई। अखिलेश यादव इस चुनाव में यादव वोटों का बंटवारा रोक नहीं पाए। बसपा का साफ मानना है कि गठबंधन से कोई फायदा नहीं हुआ, लोकसभा चुनाव में यादव वोट हमको ट्रांसफर नहीं हुए।

बसपा प्रमुख ने कहा कि गठबंधन से हमारी पार्टी को तो फायदा नहीं हुआ। अब विधानसभा उपचुनाव बसपा अकेले लड़ेगी। छह महीने में ही उप चुनाव होने हैं। 11 सीट पर होने वाले उप चुनाव में बसपा और सपा के एक-एक विधायक जीतकर संसद पहुंचे हैं। जलालपुर से बसपा विधायक रितेश पांडेय अम्बेडकरनगर से चुने गए हैं और रामपुर से सपा के आजम खान सांसद बने हैं।

बसपा ने लोकसभा चुनाव में देश की 300 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उप्र में बसपा ने सपा और रालोद से गठबंधन किया था। यहां बसपा को 10 सीटें मिलीं। बाकी राज्यों में बसपा एक भी सीट नहीं जीत पाई। मायावती ने उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात और ओडिशा के प्रभारियों को हटा दिया है। दिल्ली और मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष भी बदल दिए गए हैं। उप्र में बसपा प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा से उत्तराखंड के प्रभारी का चार्ज भी छीन लिया गया।

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