नई दिल्ली | 9 अगस्त 1942 को पुरे देश में भारत छोड़ो आन्दोलन का बिगुल बजा दिया गया. यही वो आन्दोलन था जिसने अंग्रेजो की नीवं हिलाकर रख दी थी. इस दौरान अंग्रेजो ने आन्दोलन का दबाने के पुरे जतन किये. कई आंदोलनकारी लम्बे समय तक जेल में रहे तो कई शहीद हो गए. आज इस आन्दोलन को 75 साल पुरे हो गए. इस मौके पर संसद के दोनों सदनों में विशेष सत्र का आयोजन किया जा रहा है.

जहाँ लोकसभा की कमान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज संभालेगी तो वही राज्यसभा में वित्त मंत्री अरुण जेटली चर्चा की शुरुआत करेंगे. इससे पहले लोकसभा में बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने आरएसएस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा की इन संगठनों का देश की आजादी में कोई योगदान नही रहा. इस दौरान सदन में प्रधानमंत्री मोदी भी मौजूद रहे. सोनिया से पहले मोदी ने देश की जनता से 2022 तक एक नया भारत बनाने की अपील की.

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चर्चा में भाग लेते हुए सोनिया गाँधी ने कहा की मैं सभी महिला एवं पुरुष कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि देती हूं जिन्होंने देश की आजादी में योगदान दिया. इस दौरान करो या मरो के नारे ने पुरे देश को आंदोलित कर दिया. यही वो दौर था जब पंडित जवाहर लाल नेहरु सबसे लम्बे समय तक जेल में रहे. कई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने जेल में ही दम तोड़ दिया. पुरुषो के साथ साथ महिलाओं ने भी इस आन्दोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया.

सोनिया ने संघ पर तंज कसते हुए कहा की आज जब हम उन शहीदों को नमन कर रहे हैं, जो स्वतंत्रा संग्राम में सबसे अगली कतार में रहे, तब हमें नहीं भूलना चाहिए कि उस दौर में कुछ ऐसे संगठन और व्यक्ति भी थे, जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया. इन तत्वों का हमारे देश को आजादी दिलाने में कोई योगदना नहीं रहा. भारत छोड़ो आंदोलन की सालगिरह याद दिलाता है कि इस विचार को संकीर्ण मानसिकता और संप्रदायवाद का कैदी बनने नहीं दे सकते हैं.

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