Sunday, August 1, 2021

 

 

 

कुछ लोग कश्मीर तो चाहते है लेकिन कश्मीरी नहीं: पी. चिदंबरम

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने गुरुवार को कहा कि कुछ लोग यह तो चाहते हैं कि कश्मीर भारत का हिस्सा बने लेकिन वे नहीं चाहते कि कश्मीरी, भारतीयों का हिस्सा बनें और ‘हालात की यह विडम्बना निराशाजनक’ है। पूर्व गृह एवं वित्त मंत्री चिदंबरम ने मेघालय के राज्यपाल तथागत राय के उस बयान की भी आलोचना की जिसमें उन्होंने कश्मीरी उत्पादों का बहिष्कार करने और पर्यटकों के रूप में कश्मीर नहीं जाने के आह्नवान का समर्थन किया है।

चिदंबरम ने ट्वीट किया, ‘‘हालात की यह विडम्बना बेहद निराशाजनक है। हम चाहते हैं कि कश्मीर भारत का हिस्सा बने लेकिन हम यह नहीं चाहते कश्मीरी भारतीयों का हिस्सा बनें।’’ उन्होंने कहा कि सरदार सरोवर बांध के निकट सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ मेघालय के राज्यपाल और अन्य लोगों पर नजर रख रही होगी जिन्हें लगता है कि कश्मीरियों की भारत में कोई जगह नहीं है। देश के पहले गृह मंत्री पटेल को देश की एकजुटता के सूत्रधार माना जाता है और 560 रियायतों के भारत में विलय का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है।

देहरादून, जम्मू, कोलकाता, मुजफ्फरनगर और अन्य स्थानों में पढ़ रहे या काम कर रहे कश्मीरी छात्रों एवं अन्य कश्मीरियों को कथित खतरे संबंधी घटनाओं के कारण उनके जम्मू कश्मीर स्थित अपने घरों में वापस जाने की सूचना मिली है। ये कथित घटनाएं 14 फरवरी को पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद के हमले के बाद हुई। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

इससे पहले माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने बुधवार को आरोप लगाया कि सरकार ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं जिसमें कश्मीरियों के खिलाफ हिंसा का खुलेआम आह्वान करने के साथ ही उसे अंजाम दिया जा रहा है। येचुरी ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि पुलवामा में आतंकी हमला राज्य (जम्मू कश्मीर) में राजनीति की भारी नाकामी का नतीजा है।

येचुरी ने कहा कि जिम्मेदारी तय करने, जवाबदेही के मूल लोकतांत्रिक नियम को बरकरार रखने की बजाय, हम देख रहे हैं कि मोदी सरकार ने अपनी नाकामियों को छिपाने की खातिर इस जघन्य आतंकी हमले को अंजाम देने वालों को न्याय के दायरे में लाने के लिए मिले राजनीतिक विपक्ष के समर्थन का दुरूपयोग किया है।

उन्होंने कहा कि इसने (सरकार ने) परोक्ष और प्रत्यक्ष, दोनों तरह से ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं जहां कश्मीरियों के खिलाफ हिंसा का आह्वान खुलेआम किया जा रहा है और उसे अंजाम दिया जा रहा है। यह शर्मनाक, अलोकतांत्रिक और भाजपा-आरएसएस की राष्ट्र विरोधी राजनीति है।

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