नई दिल्ली | बुधवार 9 अगस्त को पूरा देश भारत छोड़ो आन्दोलन की 75वी सालगिरह मना रहा था. इसी तारीख को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ और ‘करो या मरो’ का नारा देकर इस आन्दोलन की शुरुआत की थी. इसलिए कल संसद के दोनों सदनों में एक विशेष सत्र आहूत किया गया जिसमे सत्ता पक्ष और विपक्ष ने इस दिन के महत्तव पर चर्चा की. इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और प्रधानमंत्री मोदी ने चर्चा में हिस्सा लिया.

लोकसभ में बोलते हुए सोनिया गाँधी ने आंदोलनकारियो को नमन करते हुए कहा की जहाँ इस आन्दोलन में भाग लेने वाले लोग आजादी की लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में थे वही कुछ ऐसे लोग और संगठन भी थे जिन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन का विरोध किया. इन संगठनो का भारत की आजादी में कोई योगदान नही रहा. आज के प्रक्षेप में बात करते हुए सोनिया ने कहा की देश पर संकीर्ण मानसिकता वाली, विभाजनकारी और सांप्रदायिक सोच वाली शक्तियां हावी हो रही हैं. कानून पर गैर क़ानूनी शक्तिया हावी हो रही है.

हालाँकि सोनिया ने अपने भाषण में किसी संगठन का नाम नही लिया लेकिन माना जा है की उनका इशारा संघ की और था. इसलिए शाम होते होते बीजेपी ने सोनिया के खिलाफ हमलावर रुख अपना लिया और उन पर इतिहास की जानकारी नही होने का आरोप लगया. इसी बीच केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी सोनिया पर निशाना साधा. उन्होंने फेसबुक पर लिखे एक खुले खत के जरिये सोनिया गाँधी को खूब खरी खरी सुनाई. वही इस खत में स्मृति ने प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की.

स्मृति ने सोनिया पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया और कहा की ऐसी अपेक्षा की जाती है की भारत छोड़ो आन्दोलन जैसी देशव्यापी एतिहासिक घटना के बारे में हमें पक्षरहित होकर अपने विचार रखे. लेकिन सोनिया गाँधी अपने लम्बे भाषण में केवल 2014 में मिली हार का अफ़सोस मनाती दिखी. सोनिया पर सदन का माहौल दूषित करने का आरोप लगाते हुए स्मृति ने लिखा की जहाँ मोदी जी के भाषण में प्रगतिशीलता थी वही आपका भाषण मात्र एक इलेक्शन कैंपेन की तरह था.

पढ़े स्मृति ईरानी का खत 

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