uddhav and bhagwat 1493118524

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मुंबई | इंदौर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा दिए गए एक बयान पर सियासी घमासान शुरू हो गया है. उनके बयान पर केंद्र और राज्य सरकार में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना ने सबसे पहले पलटवार किया है. उनका कहना है की भारत सबसे पहले हिन्दुओ का देश है, बाकि अन्यो का बाद में. इसके अलावा शिवसेना ने राम मंदिर निर्माण और कश्मीर विस्थापितों को लेकर मोदी सरकार की नीतियों पर भी निशाना साधा है.

पार्टी के मुखपत्र सामना में लिखे सम्पादकीय में शिवसेना ने कहा की आरएसएस प्रमुख का कहना है की हिन्दुओ की भांति भारत अन्यो का भी है. लेकिन शिवसेना प्रमुख का मानना है की भारत सबसे पहले हिन्दुओ का है, बाद में किसी अन्य का, क्योकि मुसलमानों के 50 से भी ज्यादा देश है. ईसाईयों के पास अमेरिका और यूरोप के देश हैं. बौद्धों के लिए चीन, जापान, श्रीलंका और म्यामांर हैं. हिन्दुओं के पास भारत के अलावा कोई देश नहीं है.

शिवसेना ने राम मंदिर और कश्मीर विस्थापितों पर मोदी सरकार को घेरते हुए लिखा,’ वर्तमान में हिन्दुत्व समर्थक, बहुमत वाली सरकार है. फिर भी, वह अयोध्या में राम मंदिर बनाने की इच्छुक नहीं है और उसने इसके भविष्य को अदालत के हाथों में छोड़ दिया है. इसके अलावा हिन्दुत्व समर्थक सरकार होने के बावजूद कश्मीरी पंडितों की घर वापसी नहीं हुई है. राष्ट्रगान पर चल रही बहस पर शिवसेना ने आरएसएस पर तंज कसा.

उन्होंने कहा की यदि राष्ट्रगान के दौरान कुछ लोग खड़े ना होकर राष्ट्रगान का अपमान कर रहे हैं, तो आरएसएस प्रमुख को हिन्दुत्व समर्थक सरकार को दिशा-निर्देश देना चाहिए कि ऐसे लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाया जाए. उल्लेखनीय है की मोहन भागवत ने शुक्रवार को इंदौर में कहा था की भारत हिन्दुओ का देश है लेकिन इसका मतलब यह नही है की यह अन्य लोगो का देश नही है. भागवत ने इस बात से भी इनकार किया की कोई नेता या पार्टी किसी देश को महान बना सकती है.

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