मुंबई | महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना की 22 साल पुरानी दोस्ती का अंत हो गया है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने खुद इस बात की घोषणा करते हुए कहा की मैं गठबंधन के लिए किसी के आगे भीख नही मांगूंगा. उधर बीजेपी ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा की जिसको साथ आना है आये, जिसको जाना है जाए. गठबंधन टूटने के बाद इस बात की सुगबुगाहट तेज हो गयी है की बीजेपी एनसीपी के साथ गठंधन कर सकती है.

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को एक रैली संबोधित करते हुए गठबंधन टूटने की घोषणा की. उन्होंने कहा की अगर आप मुझे वचन दी तो मैं अभी आपको मेरा फैसला बता रहा हूँ, इसके आगे शिवसेना , महाराष्ट्र में अकेली चुनाव लड़ेगी. गठबंधन के लिए मैं किसी के आगे कटोरा ले कर खड़ा नही रहूँगा. इसके आगे जो भी रहेगा वो मेरा और शिवसेना का रहेगा. किसी से भीख नही मांगेंगे.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

उद्धव ठाकरे ने बीजेपी की एनसीपी के साथ बढ़ रही नजदीकियों पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा की पद्म पुरुस्कारों में एक पुरुस्कार गुरुदाक्षिणा के रूप में भी दिया गया है. ठाकरे का इशारा , शरद पंवार को पदम् विभूषण से नवाजे जाने की और था. आजकल प्रधानमंत्री मोदी भी एनसीपी प्रमुख शरद पंवार की काफी तारीफे कर रहे है. यही कारण है की उनको पदम् विभूषण देने का फैसला किया गया.

शिवसेना से गठबंधन टूटने पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देंवेंद्र फडनवीस ने ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा की सत्ता यह साध्य नही, साधन है विकास का. जो आये उसके साथ, जो न आये उसके बिना.. परिवर्तन तो होकर रहेगा. अब यह तय है की मुंबई के महानगर निकाय चुनावो में बीजेपी और शिवसेना अलग अलग चुनाव लड़ेगी. इस बात के पुरे असार है की बीजेपी , एनसीपी के साथ गठबंधन कर सकती है.

ऐसे में सवाल उठता है की क्या शिवसेना केंद्र और राज्यसरकार से भी अपना समर्थन वापिस लेगी. अगर ऐसा होता है तो राज्य में बीजेपी सरकार अल्पमत में आ सकती है. दरअसल महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटो में से बीजेपी के पास 122 सीटें है. जबकि बहुमत के लिए 145 सीटो की जरुरत है. ऐसे में एनसीपी बीजेपी का समर्थन कर दे, दो सरकार बच सकती है. एनसीपी के पास 41 सीटें है.

Loading...