नोटबंदी को लेकर शुक्रवार को शिवसेना ने मोदी सरकार पर देश को वित्तीय अराजकता में डालने का आरोप लगाते हुए आरबीआई की रिपोर्ट पर संसद में बहस कराने की मांग की है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि देश को ‘‘वित्तीय अराजकता’’ में डालने के लिए कौन-सा प्रायश्चित करेंगे।

शिवसेना ने कहा कि नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचाया, उद्योग प्रभावित हुए, आजादी के बाद से पहली बार रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया और सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई, लेकिन अब भी देश के शासक विकास की शेखी बघार रहे हैं।

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में शुक्रवार को एक संपादकीय में कहा गया है, ‘‘चूंकि नोटबंदी ने देश को वित्तीय अराजकता में डाल दिया, फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश से किए गए वादों को लेकर कौन-सा प्रायश्चित करेंगे? नोटबंदी की कवायद लोकप्रियता हासिल करने के लिए की गई।’’

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संजय राउत ने कहा कि आरबीआई की रिपोर्ट से गहरा धक्का लगा है। नोटबंदी के दौरान सैकड़ों की संख्या में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह एक बड़ा अपराध है। पार्टी ने कहा, ‘मोदी ने कहा था नोटबंदी का मतलब भ्रष्टाचार, काला धन और जाली नोटों को हमेशा के लिए खत्म करना है। हालांकि, पिछले दो वर्षों में ये सभी चीजें बढ़ गई। ये दावे भी खोखले साबित हुए कि नोटबंदी से कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियां खत्म हो जाएंगी और घाटी में शांति स्थापित होगी।’

शिवसेना ने कहा, ‘यह सरकारी खजाने की लूट है। आरबीआई गवर्नर ने इस लूट को रोका नहीं, जिसके लिए उन्हें अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए। आरबीआई का काम अर्थव्यवस्था की रक्षा करना है और मौजूदा सरकार में वह मतवाले बंदर की तरह हो गया है।’m

पार्टी ने कहा, ‘कालेधन का कोई अंबार नहीं लगाता और नोटबंदी से यह पैसा खत्म नहीं हो सकता, यह बहुत ही आसान-सा अर्थशास्त्र है। जिनकी समझ में यह नहीं आया उन्होंने पूर्व मनमोहन सिंह का मजाक उड़ाया, मगर अब सच सामने आ गया है।’

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