मुंबई | केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद से कश्मीर में कई आतंकी घटनाये हो चुकी है. इसके अलावा एक सबसे बड़ी समस्या पत्थरबाजी की है जिसकी वजह से कई आतंकी सुरक्षाबलो से बचकर भाग निकलने में कामयाब रहे है. ऐसी घटनाए घाटी में लगातार बढ़ रही है. पिछले साल आतंकी बुरहान वाणी की मौत के बाद तो घाटी में करीब तीन महीने तक कर्फ्यू लगाकर रखना पड़ा. इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से कश्मीर समस्या के समाधान के लिए अपनी राय रखी.

उन्होंने कश्मीर में सक्रिय आतंकियों से अपील करते हुए कहा की वो हिंसा का रास्ता छोड़कर , लोकतंत्र की मुख्यधारा का हिस्सा बने. अलगावादियों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा की वो कश्मीर की समस्याओ को जिन्दा रखने के लिए नए नए प्रपंच रचते रहते है. लेकिन मैं कश्मीर के लोगो को यकीन दिलाना चाहता हूँ की पूरा देश कश्मीर की ख्याति और प्रसिद्धि को बहाल करना चाहता है. इसके अलावा हम कश्मीर के विकास के लिए प्रतिबद्ध है.

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कश्मीर समस्या के हल के लिए मोदी ने कहा की मैं बेहद स्पष्ट हूँ की यह कैसे हल होगा, यह न गोली से और न ही गाली से हल होगा. इसके लिए कश्मीर को गले लगाना पड़ेगा. तभी यह समस्या सुलझ सकती है. हालाँकि सभी यह चाहते है की कश्मीर समस्या का समाधान शांति से हो लेकिन शिवसेना को मोदी द्वारा दिया गया सुझाव पसंद नही आया. उन्होंने इस सुझाव को ख़ारिज करते हुए कहा की केवल धारा 370 हटाकर ही इसको सुलझाया जा सकता है.

बुधवार को पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित एक संपादकीय में मोदी के बयान की आलोचना की गयी. उन्होंने लिखा की प्रधानमंत्री का यह बयान काफी चौकाने वाला है. कश्मीर मसले का हल केवल धारा 370 हटाकर ही किया जा सकता है. बताते चले की धारा 370 की वजह से ही कश्मीर को एक विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है. लोकसभा चुनावो के दौरान मोदी ने इस धारा की खूब चर्चा की थी. उस समय उन्होंने इसे हटाने का भी वादा किया था.

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