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राफेल डील को लेकर विवादों में घिरी मोदी सरकार पर अब उसके सहयोगी ही सवाल उठा रहे है। केंद्र और महाराष्ट्र की सत्ता में सहयोगी शिवसेना ने रविवार को राफेल सौदे को ‘‘बोफोर्स का बाप’’ करार दिया।

शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में कहा कि जिन लोगों ने बोफोर्स सौदे में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के रिश्तेदार पर 65 करोड़ की घूस लेने का आरोप लगाया था वे अब सत्ता में हैं। ‘‘आज उन पर राफेल विमान सौदे में 700 करोड़ रूपये की घूस लेने का आरोप है। राफेल बोफोर्स का बाप है।’’

शिवसेना नेता ने कहा, ‘सवाल यह नहीं है कि अनिल अंबानी को युद्धक विमान बनाने का अनुबंध दिया गया बल्कि प्रत्येक विमान के लिये 527 करोड़ रुपये के मूल्य के बजाए मोदी सरकार के कार्यकाल में यह सौदा 1570 करोड़ रुपये में किया गया। इसका मतलब बिचौलिये को प्रति विमान करीब 1,000 करोड़ रुपये की दलाली मिली।’

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राउत ने बीजेपी के उन आरोपों को हास्यास्पद करार दिया कि सौदे को लेकर गांधी द्वारा की जा रही आलोचना पाकिस्तान की भाषा बोलने और उसकी मदद करने सरीखा है।  उन्होने कहा कि इस सौदे के खिलाफ बार-बार बोलने से देश की राजनीति में राहुल गांधी का महत्व बढ़ा है।

उन्होंने कहा, ‘यही आरोप बोफोर्स सौदे (1980 के दशक के आखिरी वर्षों में) के दौरान कांग्रेस के खिलाफ लगाए गए थे। क्या तब इससे पाकिस्तान की मदद नहीं हो रही थी? जो सत्ता में हैं वे बोफोर्स को एक घोटाला मानते हैं… हालांकि वे यह मानने को तैयार नहीं कि राफेल भी एक घोटाला है।’

सौदे पर फ्रांस्वा ओलांद के दावों को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए शिवसेना सांसद ने हैरानी जताई की पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति को कांग्रेस अध्यक्ष का समर्थक कहा जाएगा या एक ‘‘राष्ट्र विरोधी’’ करार दिया जाएगा।

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