Thursday, October 28, 2021

 

 

 

कार्टून विवाद के बीच शिवसेना ने किया फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का समर्थन

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पैगंबर मोहम्मद (सल्ल) के अपमानजनक कार्टून का बचाव और इस्लाम विरोधी बयानों को लेकर दुनिया भर में विरोध झेल रहे फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को भारत में शिवसेना का समर्थन मिला है। मंगलवार को मुखपत्र सामना (Saamana) में शिवसेना ने कहा कि भारत पर जब भी संकट आया है फ़्रांस ने हमेशा भारत का साथ दिया है।

सामना के एक लेख में फ्रांस के मामले को लेकर लिखा गया है, ‘फ्रांस में एक चिंगारी भड़क उठी है और यह दावानल अब दुनियाभर में फैलता हुआ दिख रहा है। फ्रांस में जो हुआ, उसका संबंध एक बार फिर पैगंबर मोहम्मद के व्यंग्य चित्र से ही है। पैगंबर मोहम्मद का व्यंग्य चित्र बनाने के कारण मुस्लिम समाज की भावना भड़क उठी, वो भी इतनी कि धर्मांध मुसलमानों ने लोगों की गला काटकर हत्या कर दी है और कनाडा से फ्रांस तक निरपराध लोगों पर चाकू से हमला शुरू हो गया है।’

सामना में आगे लिखा है, ‘मुंबई-ठाणे के मुसलमानों ने भी फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के खिलाफ प्रदर्शन किया, बीजेपी के शासन वाले भोपाल में मैक्रों के खिलाफ हजारों मुसलमान एकत्र हुए और उन्होंने घोषणाबाजी की। राष्ट्रपति मैक्रों के विरोध में दुनियाभर में मुस्लिम समुदाय छाती पीट रहा है। हिंदुस्तान के संकट के समय फ्रांस हमेशा हमारे साथ खड़ा रहा है।

संपादकीय में कहा गया, संयुक्‍त राष्‍ट्र में जब-जब आवश्यकता पड़ी तब-तब फ्रांस ने हिंदुस्तान का समर्थन किया, पाकिस्तान-चीन जैसे दुश्मनों से मुकाबला करने के लिए फ्रांस ने हिंदुस्तान को रक्षा सामग्री उपलब्ध कराई। मिराज, राफेल जैसे युद्धक विमान फ्रांस से ही हिंदुस्तान को मिले हैं। ऐसे फ्रांस में धर्मांधता का उन्माद फैलाकर आतंकवाद फैलाना और उससे हिंसाचार का बढ़ना हिंदुस्तान के लिए भी हित में नहीं है।

सामना में ये भी लिखा गया है कि फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने आतंकवाद के खिलाफ जंग का ऐलान किया है और प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध में राष्ट्रपति मैक्रों को समर्थन देने की घोषणा की है। यह उचित ही है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हर किसी को समर्थन देना हमारा कर्तव्य ही है। आतंकवाद के भयंकर अंधेरे से हम आज भी सफर कर रहे हैं।

सामना में लिखा है, ‘धार्मिक उन्माद और उससे खड़े हुए आतंकवाद के कारण हिंदुस्तान को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है।’
साथ ही लिखा गया कि मैक्रों के समर्थन में इसीलिए खड़ा रहना जरूरी है, हिंदुस्तान की राजनीतिक पार्टियों व मुस्लिम समुदाय को फ्रांस के अंतर्गत विवाद में पड़ने की कोई वजह नहीं है।

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