Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

कश्मीरियों के उत्पीड़न से दुखी शेहला रशीद ने की चुनावी राजनीति से लिया संन्यास

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दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की पूर्व छात्रा और नेता शेहला रशीद ने चुनावी राजनीति छोड़ दी है। उन्होने ये बड़ा कदम यह कहकर उठाया कि वह कश्मीरियों का उत्पीड़न और बर्दाश्त नहीं कर सकती हैं।

शेहला रशीद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 24 अक्टूबर को होने वाले बीडीसी चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीर में प्रतिबंध हटाने के लिए भारत पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव है। ऐसे में सरकार चुनाव कराकर यह दिखाना चाहती है कि अभी भी लोकतंत्र जिंदा है। हालांकि जो चल रहा है वो लोकतंत्र नहीं है बल्कि लोकतंत्र की ह’त्या है।

Facebook पोस्ट में रशीद ने बताया कि केंद्र सरकार दशकों से ऐसा लोगों को मुख्यधारा से बाहर फेंकने के लिए कर रही है। बकौल पूर्व JNU छात्रा, “अगर मुख्यधारा में रहने का मतलब अपने लोगों के हितों से समझौता करना है, तब मैं इस प्रकार की मुख्यधारा का हिस्सा नहीं रह सकती हूं।”

उन्होंने आगे कहा- मैं कश्मीर में मुख्यधारा की चुनावी राजनीति से खुद के अलग होने के बारे में साफ करना चाहती हूं। मैं अपने लोगों के साथ एकजुट हो खड़ी हूं, जिन्हें ज्यादातर मूल सुविधाओं और अधिकारों को लेकर जूझना पड़ रहा है।

बता दें कि उन्होंने इसी साल मार्च में पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैजल की पार्टी JKPM ज्वॉइन की थी। उन्होंने कहा कि मैं एक्टिविस्ट के तौर पर कश्मीर के मुद्दों को उठाती रहूंगी।

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