Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

देशद्रोह के मुकदमे पर बोली शेहला रशीद – राजनीति से प्रेरित और उन्हें चुप कराने का दयनीय प्रयास

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जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की पूर्व छात्रा और कश्मीरी नेता शेहला रशीद के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है। उन पर ये मुकदमा भारतीय फ़ौज के ख़िलाफ़ कथित तौर पर फे़क न्यूज़ फैलाने के मामले में दर्ज किया गया है।

दरअसल, जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (जेकेपीएम) की नेता शेहला ने 18 अगस्त को आर्मी से जुड़े सिलसिलेवार ट्वीट्स किए थे। उन पर आईपीसी की धाराओं 124-A, 153, 153-A, 504 और 505 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘उनके खिलाफ कश्मीर घाटी में कथित रूप से सैन्य कार्रवाई की गलत सूचना ट्वीट करने के लिए आईपीसी 124-ए(देशद्रोह), 153-ए (दुश्मनी को बढ़ावा देना), 504(जानबूझकर शांति भंग करने के इरादे से अपमान करने) और 505 (उपद्रव करवाने के लिए बयान देने) के तहत मामला दर्ज कराया गया है। उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।’

इस मामले में अब उन्होने अपनी प्रतिक्रिया दी है। शेहला ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज राजद्रोह का मामले “तुच्छ”, “राजनीति से प्रेरित” और उन्हें चुप कराने का “दयनीय प्रयास” है।

शेहला ने आगे कहा, “मैं संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द किए जाने को संवैधानिक चुनौती देने के मामले में एक याचिकाकर्ता हूं। सुप्रीम कोर्ट में हमारी याचिका इसे बहाल करने के संबंध में एक मजबूत पक्ष रखती है। मेरे ट्वीट में मैंने स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया था कि ये राज्य के लोगों से मिली सूचना पर आधारित है।”

उन्होने कहा, “ऐसी स्थिति जहां संवाददाताओं को खबर देने की इजाजत नहीं, मीडिया, सोशल मीडिया, टेलीफोन और पत्र व्यवहार पर रोक लगी हुई हो, यह जरूरी था कि विमर्शों को लोगों के सामने रखा जाए। इससे देश के अन्य हिस्सों में रह रहे लोगों को पता चले कि जम्मू-कश्मीर में क्या हो रहा है।”

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “एक राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर मैं अपना काम कर रही थी। जिन ट्वीट के लिए मुझ पर निशाना साधा जा रहा है, उनमें मैंने लोगों तक सुविधाएं सुनिश्चित करने के प्रशासन के सकारात्मक कार्यों का जिक्र किया। यह अपने आप में सबूत है कि मेरा मकसद बस सच पर प्रकाश डालना था जिसका जिक्र भारत और अन्य स्थानों पर प्रकाशित खबरों में भी किया गया। मैं कश्मीर के लोगों के अधिकारों को बहाल करने की जंग में वहां के लोगों के साथ खड़ी हूं।”

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