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केंद्र की मोदी सरकार द्वारा मुस्लिम वुमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज) बिल, 2017 को राज्यसभा में पास कराने की कोशिशों में जुटी है. ऐसे में एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने मोदी सरकार को बड़ा झटका देते हुए कहा कि तलाक से जुड़े शरीअत कानून में किसी भी सरकार को दख़ल देने का हक़ नहीं है.

औरंगाबाद में पार्टी रैली में उन्होंने कहा कि इस्लाम में कुरान के जरिए तलाक की व्यवस्था है. यह एक संदेश है और किसी भी शासक को इसमें दखल नहीं देना चाहिए. उन्होंने कहा, यदि एक साथ तीन तलाक देने पर रोक महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा है तो यह काम मुस्लिम समुदाय के प्रभावशाली लोगों और मौलानाओं को विश्वास में लेकर किया जाना चाहिए.

ध्यान रहे मोदी सरकार तीन तलाक को आपराधिक बनाने वाले इस बिल को लोकसभा में पास करा चुकी है. लेकिन राज्यसभा में पूर्ण बहुमत नहीं होने और विपक्ष के विरोध के चलते ये बिल पास नहीं हो पाया है. विपक्ष ने इस बिल को स्टैंडिंग कमेटी को भेजे जाने की मांग की हुई है.

साथ ही पवार ने किसानों की मौत का मुद्दा भी उठाया. उन्होने कहा, हजारों किसानों ने अपने बच्चों के बारे में कोई सोच-विचार न करते हुए आत्महत्या की है, क्योंकि खेती करना अब किसान के बस की बात नहीं रही है. केंद्रीय बजट का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें घोषणा की गई है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार किसानों को फसल के लागत मूल्य से डेढ़ गुना ज्यादा दाम दिया जाएगा. ये सभी बातें झूठ हैं.

उन्होंने कहा, किसान तुअर, मूंग, ज्वार, बाजरा, हल्दी आदि फसलों का उत्पादन भी करते हैं. इस सरकार के पास 25 फसलों को देखने का कोई तंत्र नहीं है. उक्त फसलों की खरीद के लिए बजट में पैसों का प्रावधान नहीं रखा गया. इसलिए घोषणा पर सवाल खड़े होते हैं.

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