असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) को लेकर लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव ने कहा कि सरकार को इसे लागू करने से पहले सभी दलों के साथ विचार विमर्श कर कोई ‘सर्वसम्मत रास्ता’ निकालना था।

यादव ने एक मुलाकात में कहा, ‘‘असम की समस्या पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर सरकार को इसके हल के लिये कोई सर्वसम्मत रास्ता तलाशना था। ये मैं मानता हूं कि असम का मामला है, लेकिन इसका लोकतंत्र पर असर हुआ है। उसका न्याय संगत तरीके से हल निकालना चाहिये। लेकिन लगता नहीं है कि इस सरकार के रहते इंसाफ होगा।’’

उन्होंने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में कई लोग यहां आए और यहां से गए। यहां तिब्बत के लोग आये। जब देश बंटा तो कितने बांग्लादेशी यहां आये और कितने लोग यहां से बांग्लादेश गये। पाकिस्तान बना तो कितने लोग यहां से गये जो वहां मुहाजिर कहलाये और कितने सिख यहां आये। ये आबादियां इधर से उधर सबसे ज्यादा इस देश में ही हुई हैं। अफसोस है कि इस पर संसद में ठीक से बहस नहीं चल रही है। किस तारीख को कौन यहां आया है, ये यदि हम ढूंढेंगे तो देश तबाह हो जायेगा।

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बता दें कि देश में असम इकलौता राज्य है जहां सिटिजनशिप रजिस्टर की व्यवस्था लागू है।  जिसके तहत राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का दूसरा ड्राफ्ट सोमवार को जारी किया गया। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया शैलेख ने सोमवार को बताया कि 2 करोड़ 89 लाख 83 हजार छह सौ सात लोगों को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में योग्य पाकर उन्हें शामिल किया गया है और 40.07 लाख आवेदकों को इसमें जगह नहीं मिली है।

NRC में 24 मार्च 1971 की आधी रात तक राज्‍य में प्रवेश करने वाले लोगों को भारतीय नागरिक माना जाएगा। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) के मुताबिक, जिस व्यक्ति का सिटिजनशिप रजिस्टर में नहीं होता है उसे अवैध नागरिक होगा।

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