पटना | जदयू के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता शरद यादव ने महागठबंधन टूटने पर दुख जाहिर करते हुए कहा की यह गठबंधन 5 साल के हुआ था. नितीश के फैसले से 11 करोड़ लोगो का विश्वास टूटा है. यह पहला मौका है जब शरद यादव ने खुलकर नितीश के फैसले की आलोचना की है. यही नही शरद यादव ने इस फैसले के विरोध ने एक यात्रा करने का भी फैसला किया है. उम्मीद है की इस यात्रा के बाद शरद कोई बड़ा फैसला कर सकते है.

गुरुवार को पटना पहुंचे शरद यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा की जिस जनता ने गठबंधन बनाया था, जिस जनता से हमने जो करार किया था, वो ईमान का करार था. वो टूटा है जिससे हमको तकलीफ हुई है. फ़िलहाल लोकशाही में विश्वास का संकट पैदा हो गया है. जिन लोगो के खिलाफ हमने चुनाव लड़ा, जिनका मैनिफेस्टो हमसे अलग था, आज उनका मैनिफेस्टो हमसे मिल गया. 70 साल के इतिहास में ऐसा कोई उदहारण नही मिलता.

शरद यादव ने आगे कहा की इस मुद्दे को लेकर मैं जनता के बीच जाऊंगा , उनसे संवाद करूँगा. गठबंधन टूटने से 11 करोड़ लोगो का विश्वास टूटा है. शरद ने साफ शब्दों में कहा की वो अभी भी गठबंधन के साथ है. माना जा रहा है की शरद , तीन दिविसीय यात्रा के समापन के बाद कुछ बड़ा फैसला कर सकते है. बताते चले की शरद यादव गठबंधन तोड़ने के खिलाफ थे. उन्होंने पहले भी नितीश से तेजस्वी का इस्तीफा न मांगने के लिए कहा था. लेकिन नितीश ने उनकी एक न सुनते हुए बीजेपी के साथ गठबंधन कर सरकार बना ली.

उसी दिन से शरद, नितीश से नाराज चल रहे है. उनका कहना है की नितीश ने न उनसे गठबंधन तोड़ने और न ही बीजेपी के साथ सरकार बनाने के बारे में कोई सलाह मशविरा किया. गुजरात राज्यसभा चुनाव के दौरान भी यह नाराजगी खूब देखने को मिली जब शरद के करीबी माने जाने वाले जदयू विधायक ने पार्टी व्हिप के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार को अपनी वोट दी. इस दौरान वोटो की गिनती के दौरान हुए सियासी ड्रामे पर भी शरद ने बीजेपी पर कई प्रहार किये.

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