राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी मरकज जमात के कार्यक्रम से पूरे देश की हालत चिंताजनक हो गई है। आयोजकों को यह कार्यक्रम टालना चाहिए था। इसके साथ ही उन्होने मुस्लिमों को शब-ए-बरात पर घरों में रहने की नसीहत दी। उन्होने डॉ. बीआर आंबेडकर की जयंती के मौके पर होने वाले कार्यक्रमों को भी स्थगित करने का अनुरोध किया।

पवार ने फेसबुक के जरिए किए गए संबोधन में कहा, ‘दुर्भाग्य से, इस साल कोरोना वायरस का खतरा है और हमें कुछ पाबंदियों का पालन करना है लेकिन मुझे यकीन है कि लोग अपने घरों के अंदर भगवान राम को याद कर रहे होंगे।’ पवार ने दिल्ली में तबलीगी जमात के कार्यक्रम पर कहा, ‘यह कार्यक्रम करने से बचना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और शायद इसकी कीमत दूसरों को चुकानी पड़े।’

एनसीपी चीफ ने कहा कि इस बात की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता है कि कार्यक्रम में शामिल कुछ लोग संक्रमित हो सकते हैं। उन्होंने कोविड-19 की वजह से उपजी स्थिति को देखते हुए अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया। पवार ने कहा कि शब-ए-बारात (मगफिरत या गुनाहों की माफी की रात) 8 अप्रैल को है। इस रात को मुसलमान दुनिया से जा चुके अपने रिश्तेदारों को याद करते हैं और कब्रिस्तान जाते हैं। यह घर में रहकर मनाना चाहिए। निजामुद्दीन जैसी घटना ना हो, इसके लिए एहतियात बरतनी चाहिए।

संविधान निर्माता आंबेडकर की 14 अप्रैल को मनाई जाने वाली जयंती पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोगों को आंबेडकर जयंती पर होने वाले कार्यक्रमों को टालने पर विचार करना चाहिए। पवार ने कहा, ‘हम सामान्य तौर पर इसे (जयंती को) दो या तीन महीने मनाते हैं। हमें सोचना चाहिए कि हमें क्या वाकई इस मौके (कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए) पर इस कार्यक्रम को मनाना चाहिए?’ उन्होंने कहा कि अगर हम एक साथ जुटे तो हमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

शरद पवार ने गुरुवार को राज्य के नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन 90 फीसदी लोग कर रहे हैं। सिर्फ 10 फीसदी लोग इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे कोरोना जैसा संसर्गजन्य रोग को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

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