यूपी के संभल से लोकसभा चुनावों में सपा-बसपा गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार पूर्व सांसद डॉक्टर शफीक उर रहमान बर्क़ ने ‘वंदेमातरम’ को गैर इस्लामिक बताते हुए कहा कि वह आज भी इसका विरोध करते है।

बता दें कि यूपीए-2 के समय संसद में चल रहे राष्ट्रगीत का विरोध करते हुए बर्क़ ने वॉकआउट कर दिया था। जिसके बाद जमकर बवाल मचा था। हालांकि वह अपने विरोध पर कायम रहे थे। पूर्व सांसद ने कहा कि वह आज भी ‘वंदेमातरम’ का पूरा विरोध करते हैं। साथ ही एक बार फिर ये साफ कहा कि राष्ट्रगीत गैर इस्लामिक है और मैं उसका विरोध करता रहूंगा।

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शफीकुर्रहमान बर्क़ बुधवार को सपा कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए केंद्र की भाजपा सरकार को दुश्मन पार्टी बताया। जब उनसे पूछा गया कि आप वंदेमातरम में तो विश्वास नहीं करते फिर क्या संभल में जातीय राजनीति करने जा रहे हैं तो उन्‍होंने कहा कि वह सपा-बसपा गठबंधन की नीतियों पर जनता से वोट मांगेंगे।

वंदे मातरम’ से मुस्लिमों को इसलिए है ऐतराज –

दरअसल मुस्लिमों का कहना है कि ये गीत जिस “आनन्द मठ” उपन्यास से लिया गया, वह मुसलमानों के खिलाफ लिखा गया है. इसके अलावा इस गीत में देवी दुर्गा को राष्ट्र के रूप में दिखाया गया है और इस्लाम धर्म सिर्फ एकेश्वरवाद पर आधरित है.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सर्वोच्च न्यायालय ने वंदे मातरम संबंधी एक याचिका पर फैसला दिया था कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगान का सम्मान तो करता है पर उसे गाता नहीं तो इसका मतलब ये नहीं कि वो इसका अपमान कर रहा है. इसलिए इसे नहीं गाने के लिये उस व्यक्ति को दंडित या प्रताड़ित नहीं किया जा सकता. चूंकि वंदे मातरम् इस देश का राष्ट्रगीत है अत: इसको जबरदस्ती गाने के लिये मजबूर करने पर भी यही कानून व नियम लागू होगा.

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