Thursday, December 9, 2021

रोहिंग्या शरणार्थियों को भी देश रहने का है मौलिक अधिकार: ओवैसी

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एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को दावा किया कि केंद्र द्वारा उच्चतम न्यायालय में रोहिंग्या के मुद्दे पर दायर किए गए हलफनामा कानूनी तौर पर टिक ही नहीं सकता क्योंकि शरणार्थियों को भी मौलिक अधिकार प्राप्त करने का भी अधिकार है.

अपने हलफनामे में, केंद्र ने कहा कि रोहंग्या मुसलमान देश में “अवैध” अप्रवासियों में से हैं. शपथ पत्र ने यह भी कहा कि देश के किसी भी हिस्से में रहने और स्थायित्व का मौलिक अधिकार केवल नागरिकों के लिए उपलब्ध है और अवैध शरणार्थी पर ऐसे किसी दायरे में नहीं आते है.

ओवैसी ने कहा कि “सरकार द्वारा आज जो हलफनामा दायर किया गया है, मेरी राय है कि यह सरकार का एक पुराना प्रचार है. यह दोबारा शुरू हो गया है और इसका स्टैंड करने के लिए कोई कानूनी दांव-पैच नहीं है. यह अनुच्छेद 12 और 14 का उल्लंघन है.

उन्होंने कहा, “जहां तक मेरी पार्टी का सवाल है, हम दृढ़ राय के हैं कि रोहंगिया मुद्दे को मुस्लिम मुद्दे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.  यह एक मानवीय मुद्दा है. उन्होंने कहा “ये लोग अपने देश से दूर भागकर जान बचाने आए है. और इनको दुबारा वहीँ पर वापस भेजना अन्याय होगा.

ध्यान रहे इससे पहले ओवैसी ने सवाल उठाया था कि जब देश में तिब्‍बती शरणार्थी तौर पर रह सकते हैं तो रोहिंग्‍या मुस्लिम क्‍यों नहीं रह सकते ? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए कहा कि जब तसलीमा नसरीन देश में रह सकती है तो रोहिंग्‍या मुस्‍लि‍म क्‍यों नहीं रह सकते.

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