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बिहार की राजनीति में बुधवार को बड़ा उलटफेर करते हुए हिन्‍दुस्‍तानी आवाम मोर्चा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जीतनराम मांझी एनडीए छोड़कर महागठबंधन में शामिल हो गए.

बुधवार को लालू यादव के बेटों तेजस्वी-तेज प्रताप यादव और आरजेडी नेता भोला यादव के साथ बंद कमरे में मीटिंग के बाद जीतन राम मांझी ने ये कदम उठाया है. मांझी ने बताया कि इसकी औपचारिक घोषणा रात आठ बजे की जायेगी.

इस सबंध में तेजस्‍वी यादव ने कहा कि जीतनराम मांझी बिहार के बड़े नेता हैं. वे दलितों-पिछड़ों के नेता हैं. उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री रहते हुए काफी सराहनीय काम किया है. मांझी लगातार दलितों और पिछड़ों की अावाज उठाते रहे हैं. तेजस्‍वी ने कहा कि मांझी उनके लिए पिता तुल्‍य व अभिभावक हैं. अब वे साथ आ गए हैं. महागठबंधन में उन्‍हें हमेशा सम्‍मान मिलेगा। एनडीए में सहयोगी दलों का सम्‍मान नहीं किया जाता है.

ध्यान रहे जीतन राम मांझी ने जहानाबाद सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिए भी टिकट पर अपनी दावेदारी पेश की थी, लेकिन उनकी पार्टी को टिकट नहीं दिया गया. इसके बाद मांझी ने कहा था कि एनडीए में सबको कुछ न कुछ मिल रहा है. एक ‘हम’ ही है जिसे कुछ नहीं मिला.

2014 लोकसभा चुनाव में जेडीयू की करारी हार के बाद नीतीश कुमार के बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने पर जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री का पद संभाला था .2015 में जनता दल (यू) ने जीतन राम मांझी से पद से इस्तीफा देने को कहा. लेकिन उन्होंने मना कर दिया. जिसके बाद उन्हें पार्टी से बाहर होना पड़ा और नीतीश कुमार फिर से सीएम बने.

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