रेशमा पटेल की EVM Petition में सुप्रीम कोर्ट में इलेक्शन कमीशन ने हलफनामा फाइल किया.*

गुजरात की पाटीदार नेता रेशमा पटेल ने आगामी गुजरात असेंबली चुनावो में EVM के साथ VVPAT का इस्तेमाल करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पिटिशन दायर की है। जिसमे सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को हलफनामा फाइल करने का आदेश दिया था।

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चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा फ़ाइल कर अपने ये बाते कही है।

चुनाव आयोग ने कहा कि अगरचे चुनाव आयोग के चेयरमैन नसीम ज़ैदी साहब ने  12 मई 2017 को पत्रकार परिषद् में यह ऐलान किया था कि आगामी तमाम चुनाव में VVPAT वाले EVM मुहैया कराये जाएंगे लेकिन उनके इस एलान का अमलीकरण चुनाव आयोग तब ही कर पायेगा जब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन बनाने वाली कम्पनियाँ उनके कन्साइनमेंट के मुताबिक़ उनको VVPAT वाले EVM की डिलीवरी समय पर कर सकेंगी। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि चुनाव आयोग के पास 53,500 VVPAT वाले EVM मौजूद हे और गुजरात असेंबली इलेक्शन के लिए उन्हें टोटल 70,000 VVPAT वाले EVM की जरुरत है। इस लिए अगर चुनाव आयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन बनाने वाली कम्पनियाँ – BEL और ECIL के बीच तय किये हुवे कन्साइनमेंट के मुताबिक़ कुछ MACHINES की डिलीवरी अगस्त में और बाकी MACHINES की डिलीवरी सितम्बर में होनी हे। इस लिए अगर उन्हें समय पर MACHINES मिलते है तो वो गुजरात असेंबली इलेक्शन पेपर ट्रेल वाले EVM से करा पाएंगे। चुनाव आयोग ने ये भी कहा के इस के बावजूद भी उन्हें भारत सरकार से इन वोटिंग मशीनों की सुरक्षा, व्यवस्था और रखरखाव के लिए फंड की आवशयकता रहेगी मतलब की अगर मशीन की डिलीवरी समय पर हो गई और सरकार से वोटिंग मशीनों की सुरक्षा, व्यवस्था और रखरखाव के लिए फंड मुहैया हो गया तो वो आने वाले गुजरात असेंबली इलेक्शन में पेपर ट्रेल वाले evm का इस्तेमाल जरूर करेंगे।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने अपनी जिम्मेदारी को evm बनाने वाली कंपनियां और भारत सरकार पर थोपने का भी प्रयास किया है और evm बनाने वाली कंपनियां  – BEL और ECIL भी इस केस में रेस्पोंडेंट्स हैं। इस लिए BEL और ECIL के जिम्मेदार अफसर भी अपने वकीलों के साथ कोर्ट में पेशी पर मौजूद रहते हैं। इस केस में ईवीएम बनाने वाले कंपनियों के वकील अगली सुनवाई में बताएँगे की उनका क्या जवाब है। अगली सुनवाई 8 अगस्त को होनी है।

रेश्मा पटेल की प्रतिक्रिया

रेश्मा पटेल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा की सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में EVM के साथ VVPAT लगाने का आदेश दिया था और अब ये 2017 चल रहा है, SC के आदेश के चार साल बीत चुके है लेकिन फिर भी इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के पास VVPAT वाले EVM मशीनों के लिए डिलिवरी, फंड, EVM  बनाने वाली कंपनियों को दिया गया ऑर्डर इत्यादी खुलासे अब करने पड रहे है।

मतलब की चुनाव आयोग जनता को पेपर ट्रेल वाले EVM देने के लिए आज की तारीख में कोई सुनिश्चित व्यवस्था नही कर पाया है और जनता के हित के लिए चुनाव आयोग ने कोई ठोस कदम नही लिए और इस बाबत में भारत सरकार ने भी लापरवाही रखी है ये बात तय है,  गुजरात के विधानसभा चुनाव में भी सुप्रीम कोर्ट के सामने भारतीय चुनाव आयोग VVPAT वाले EVM का इस्तेमाल को लेकर सक्षम नही दिखा वो भी उस वक्त जब पुरे देश के अलग अलग राज्यो के चुनावो मे EVM मे गडबडी सामने आ रही हैं।

EVM अब भरोसे के योग्य नही रहा, सब लोगो के भीतर लोकतंत्र खतम होने का भय है। तब भी भारत सरकार तथा चुनाव आयोग ‘जो और तो’ के खेल मे लोगो को उलझाना चाहते हैं। और जो अगर चुनाव् आयोग पेपर ट्रेल के साथ evm मशीन देने में असमर्थ हो तो उन्हें आने वाले गुजरात असेम्बली चुनाव बेलेट पेपर पर ही कराने होंगे। रेश्मा पटेल ने कहा पारदर्शक मतदान हमारा अधिकार ओर लोकशाही को बचाने के लिये वो लड़ती रहेगी और उन्होंने ने कहा माननीय सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा हे की प्रजाहित में अदालत से न्याय जरुर मिलेगा ।

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